इस्लामाबाद पहुंचे जेडी वैंस, क्या पुरानी शर्तो पर अड़ा ईरान मानेगा शांति का प्रस्ताव?
इस्लामाबाद। अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वैंस ईरान के साथ शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंच गये हैं। वैंस का स्वागत पाकिस्तान के विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार, सेना प्रमुख आसिम मुनीर और इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास की चार्ज डी अफेयर्स नैटली बेकर ने किया। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वैंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनर कर रहे हैं। यह तीनों शनिवार को इस्लामाबाद पहुंचे। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर ग़ालिबफ़ के नेतृत्व में ईरान के अधिकारी भी बातचीत के लिए शनिवार तड़के ही पाकिस्तान पहुंच गये थे।
युद्धविराम वार्ता के लिए इस्लामाबाद पहुंचा ईरानी प्रतिनिधिमंडल
ईरान का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल युद्धविराम वार्ता के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंच गया है और चेतावनी दी है कि उसकी पूर्व शर्तें पूरी नहीं होने पर वार्ता प्रक्रिया पटरी से उतर सकती है। मोहम्मद बाकर ग़ालिबाफ़ के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल में सुरक्षा, राजनीतिक, सैन्य, आर्थिक और कानूनी समितियों के सदस्य शामिल हैं। यह दल शुक्रवार रात इस्लामाबाद पहुंचा।
ईरानी प्रतिनिधिमंडल में अन्य अधिकारियों में विदेश मंत्री अब्बास अराघची, सुप्रीम नेशनल डिफेंस काउंसिल के सचिव अली-अकबर अहमदियन, सेंट्रल बैंक के गवर्नर अब्दोलनासेर हेमती, साथ ही संसद के कई सदस्य शामिल हैं।अमेरिका के पक्ष से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, वाशिंगटन के क्षेत्रीय दूत स्टीव विटकॉफ, और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार और दामाद जैरेड कुशनर भी इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं।
इससे पहले, ट्रंप ने मंगलवार को ईरान के खिलाफ अमेरिकी हमलों में दो सप्ताह का विराम घोषित किया था, जो इस संघर्ष के दौरान अमेरिका के शामिल होने के 40 दिन बाद आया। ग़ालिबाफ़ ने शुक्रवार को कहा था कि लेबनान में युद्धविराम और ईरान की रोकी गई संपत्तियों की रिहाई, अमेरिका के साथ वार्ता शुरू करने से पहले आवश्यक शर्तें हैं। ईरान द्वारा पेश 10 सूत्री प्रस्ताव को ट्रंप ने वार्ता के लिए "कारगर आधार" बताया है। इसमें सभी मोर्चों पर आक्रामक कार्रवाई रोकने की शर्त शामिल है, जिसमें लेबनान भी शामिल है।
ट्रंप की घोषणा के बाद हालांकि इज़रायल ने लेबनान पर हमले तेज किये हैं, जिनमें महिलाओं और बच्चों सहित सैकड़ों लोगों की मौत हुई है। ग़ालिबाफ़ ने इस्लामाबाद पहुंचने पर कहा कि ईरान का अमेरिका के साथ पिछले अनुभव विश्वासपूर्ण नहीं रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि "एक वर्ष से भी कम समय में दो बार, वार्ता के दौरान और ईरान की सद्भावना के बावजूद, अमेरिका ने हम पर हमला किया और कई युद्ध अपराध किए।"उन्होंने कहा, "हमारे पास सद्भावना है, लेकिन हमें दूसरे पक्ष पर भरोसा नहीं है।"
ग़ालिबाफ़ ने कहा कि यदि अमेरिका वास्तविक समझौते के लिए तैयार होगा और ईरानी जनता के अधिकारों को मान्यता देगा, तभी ईरान समझौते के लिए तत्परता दिखाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका वार्ता को "भ्रामक प्रक्रिया" के रूप में इस्तेमाल करता है, तो ईरान अपनी क्षमताओं के बल पर अपने राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता की रक्षा करने के लिए तैयार है।
गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान के इस्लामाबाद में शनिवार को वार्ता होनी है। बातचीत में कोई खलल न पड़े इसके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात की है।
