नेपाल में दिखने लगा बालेन सरकार का असर

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
On

यशोदा श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार-

दूसरे देशों में राजदूतों की नियुक्तियां प्रायः सत्ता दल की मर्जी पर ही होते हैं। इनमें ज्यादातर नियुक्तियां राजनीतिक होती हैं और कुछ ब्यूरोक्रेट्स आधारित। राजदूतों की नियुक्ति में यही प्रक्रिया नेपाल की भी है, लेकिन क्या नए राजदूत भी जेन जी श्रेणी के होंगे?

MUSKAN DIXIT (58)

नेपाल में बालेन सरकार के करीब एक पखवारे ही हुए, इस बीच उनके कार्यशैली को देखें तो कह सकते हैं कि आने वाले दिनों में निश्चित ही ढेर सारे ऐसे निर्णय लिए जा सकते हैं जो परिवर्तन का संदेश देते हों। वे चाहे शिक्षा से जुड़े हुए फैसले हों, महिला अधिकार की हो या पलायन, रोजगार और विदेश नीति से जुड़े हुए फैसले हों। एक पखवाड़े के भीतर ही अपने मंत्रिमंडल के एक सहयोगी को रुखसत कर उन्होंने अन्य मंत्रियों को सख्त संदेश भी दे दिया है।

बालेन सरकार ने जवाबदेही और जिम्मेदारी की एक स्पष्ट मिसाल पेश करते हुए श्रम, रोजगार तथा सामाजिक सुरक्षा मंत्री दीपक कुमार साह को उनके पद से बर्खास्त कर दिया है, जबकि स्वास्थ्य एवं जनसंख्या मंत्री निशा मेहता को कड़ी चेतावनी दी गई है। सत्ता रूढ़ दल राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रवि लामि छाने की लिखित सिफारिश में श्रम मंत्री पर पद के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया गया था। 

खबर के अनुसार दीपक कुमार साह ने अपनी पत्नी को लंबे समय से निष्क्रिय पड़े स्वास्थ्य बीमा बोर्ड में सदस्य के रूप में सक्रिय कराकर अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया। मंत्री बनने के महज 15 दिन के भीतर ही साह को पद से हटाया जाना इस बात का संकेत है कि सरकार और पार्टी नेतृत्व भ्रष्टाचार या पद के दुरुपयोग पर किसी भी प्रकार की नरमी बरतने के पक्ष में नहीं है। अपने मंत्रालय के प्रति अपेक्षित गंभीरता न दिखाने पर स्वास्थ्य मंत्री निशा मेहता को भी औपचारिक रूप से चेतावनी दी गई है, जिसे सरकारी हलकों में एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि अनुशासन और पारदर्शिता पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। 

बालेन शाह की विदेश नीति पर दुनिया के करीब 182 देशों की नजर है, जहां से नेपाल के राजनयिक संबंध हैं। इसी के साथ इस बात को लेकर भी उत्सुकता है कि बालेन शाह बतौर नेपाली पीएम अपनी पहली विदेश यात्रा में किस देश को तरजीह देते हैं। पूर्व की सरकारों के प्रधानमंत्री अमूमन चीन अथवा भारत को अपनी प्राथमिकता में रखते थे।
बालेन सरकार की अभी तक जो कार्यशैली दिख रही है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि वे अपनी विदेश नीति को लेकर काफी गंभीर है। संभवतः इसी उद्देश्य से हाल में उन्होंने सिंह दरबार में विदेशों में तैनात अपने राजदूतों की मीटिंग ली है। आम तौर पर ऐसा नहीं होता रहा है। बालेन सरकार ने अभी भारत सहित छः देशों के राजदूतों को वापस बुलाने का फरमान जारी किया है। इसके पहले ऐसी ही नियुक्ति वाले 11 देशों के राजदूतों को वापस बुलाने का आदेश कार्की सरकार ने जारी किया था। आने वाले कुछ दिनों में अन्य देशों के राजदूतों में बदलाव संभव है।

संबंधित समाचार