सुरक्षा पर सवाल: बरेली जंक्शन की अजब कहानी...खुफिया निगरानी हुई ''बेमानी''
बरेली, अमृत विचार। दिल्ली-लखनऊ के बीच सबसे बड़े रेल पड़ाव और सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील बरेली जंक्शन की खुफिया निगहवानी थम सी गई है। कभी यहां की निगरानी को 150 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। उसके बाद जैसे-जैसे कैमरे खराब होते रहे, उनको हटाया जाता रहा। चौंका देने वाली बात ये है कि अब तक 113 कैमरों हटा तो दिए गए हैं मगर लगाए बिल्कुल नहीं गए। इंस्पेक्टर जीआरपी पत्र पर पत्र दोड़ा रहे हैं रहे हैं मगर रेलवे प्रशासन का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा। ऐसे में अगर जंक्शन पर कोई अनहोनी हुई तो राजकीय रेलवे पुलिस कैसे अंधेरे में तीर चलाएगी, इसे लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
जंक्शन परिसर से बाहर तक की स्थिति यह है कि कुल 37 सीसीटीवी कैमरे ही बचे हैं। उसमें से भी दो खराब हैं। प्लेटफॉर्म नंबर- 1 को छोड़कर कहीं भी सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था नहीं है। इसे लेकर जीआरपी लगातार चिंता जाहिर कर रही है। जंक्शन पर पहले भी अपहरण, चोरी और सिटी स्टेशन पर दुष्कर्म जैसी गंभीर घटनाएं सामने आ चुकी हैं। जीआरपी थाना प्रभारी सुशील वर्मा ने इस गंभीर समस्या को लेकर तीन बार संबंधित विभाग को पत्र लिखकर खराब कैमरे ठीक कराने या हटाए गए कैमरों की जगह नए लगवाने की मांग की, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। हैरानी की बात यह है कि नए कैमरे लगाने के बजाय पुराने कैमरों को भी हटा दिया गया। जिससे सुरक्षा व्यवस्था और कमजोर हो गई है। बरेली जंक्शन उत्तर रेलवे के व्यस्त स्टेशनों में से एक है, जहां से प्रतिदिन दो से ढाई सौ ट्रेनें गुजरती हैं और करीब 50 हजार से अधिक यात्री सफर करते हैं। इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही के बावजूद निगरानी तंत्र का कमजोर होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी चिंता का विषय है।
बच्ची चोरी के वक्त काम आया था सीसीटीवी
बता दें कि बीते साल हरिद्वार के रहने वाले पति पत्नी अपने बच्चों के साथ यहां सरकारी अस्पताल में दवा लेने के लिए पहुंचे थे। जहां से बच्ची का किडनैप हो गया। बच्ची के माता-पिता ट्रेन का इंतजार ही कर रहे थे कि मौके पर घात लगाए एक दंपति ने बच्ची को वहां से किडनैप कर लिया और बेचने के इरादे से ले गया। माता-पिता को जैसी पता चला की बच्ची नहीं है तो शोर मचाया। मौके पर जीआरपी पुलिस पहुंची तो सीसीटीवी खंगाले गए। इसके बाद रेलवे पुलिस ने छह दिन की कड़ी मेहनत के बाद और कई सीसीटीवी कैमरे देखने के बाद बच्ची को बरामद करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इस घटना का खुलासा करने में भी सीसीटीवी कैमरे की ही मदद मिली थी।
स्टेशन के पास हुआ था एटा की किशोरी से रेप
बीते साल एटा में रहने वाले परिवार के छह सदस्य उत्तराखंड के टनकपुर गए थे। वहां मेला में शामिल होने के बाद सभी लोग बरेली सिटी रेलवे स्टेशन पहुंचे। उन सभी को सिटी स्टेशन से कासगंज जाने वाली दूसरी ट्रेन पकड़नी थी। रात को वे सभी भूलवश दूसरी ट्रेन में चढ़ गए। भूलवश गलत ट्रेन में बैठी किशोरी से देर रात में दरिंदगी की गई। इस वारदात को तब अंजाम दिया गया जब वह बरेली सिटी और बरेली जंक्शन के बीच आउटर पर बोगी से कूदकर वापस जा रही थी। इसी बीच आरोपी उसे झाड़ियों में खींच ले गया। वह दुष्कर्म कर आरोपी मौके से फरार हो गया। तब बदहवास व घायल किशोरी रेल पटरी किनारे पैदल चलते हुए आरपीएफ के पास पहुंची। जिसका देर रात स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। उसके शरीर पर कई जगह चोट के निशान मिले और रक्तस्राव भी हो रहा था।
जीआरपी थाना प्रभारी सुशील वर्मा ने बताया कि रेलवे अफसरों से तीन बार पत्राचार करते हुए जंक्शन पर पर्याप्त सीटीवी कैमरे लगाने की मांग की जा चुकी। यहां पर कैमरे लगाने के बजाय पुराने खराब पड़े 113 कैमरे भी हटा दिए गए हैं। हालत यह है कि 150 कैमरे में सिर्फ 37 बचे हैं उसमें से भी खराब पड़े हैं। संवेदनशील रेलवे जंक्शन की सुरक्षा की लिहाज से यह स्थिति चिंताजनक है।
