काव्य : नया इतिहास बनाते हैं...
नया इतिहास बनाते हैं
धोखा मिला तो दिल टूटा
आंखों ने चुपचाप कहा बस अब और नहीं
पर अंदर कहीं एक आवाज थी
ये अंत नहीं ये तो एक शुरुआत है
पैसे के पीछे भागे लोग,
अपनों को जाने कब छोड़ गए
जो साथ निभाने की कसमें खाई थीं
वो सब शब्दों में तोड़ गए
मैं गिरा जरूर था उस दिन
पर टूटा कभी बिल्कुल नहीं
धोखे ने मुझे सिखा दिया
भरोसा सब पर करना नहीं
अब मेहनत मेरी पहचान है
सच्चाई हमेशा मेरे साथ है
धीरे-धीरे ही सही मगर
अब खुद पर ही विश्वास है
पैसा आए तो सिर न झुके
जाए तो कभी दिल न रोए
जिसके पास आत्मसम्मान हो
वो हर हाल में ख्वाब संजोए
धोखा देने वाले शायद
आज चैन से सो जाते हों
पर सच्चाई की राह चलने वाले ही
एक दिन नया इतिहास बनाते हैं।
वर्षा वार्ष्णेय. कवयित्री, अलीगढ़
