UP : नोएडा में श्रमिकों के उग्र प्रदर्शन के बाद केंद्र ने मांगी रिपोर्ट 

Amrit Vichar Network
Published By Virendra Pandey
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लखनऊ, अमृत विचार : उत्तर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों के उग्र विरोध-प्रदर्शनों के बाद केंद्र सरकार सतर्क हो गई है। श्रम मंत्रालय के तहत मुख्य श्रम आयुक्त ने हालात की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। अधिकारियों के अनुसार अचानक भड़की हड़तालों और हिंसक घटनाओं ने प्रशासन को भी चौंका दिया है। 

दरअसल, विरोध की शुरुआत सात अप्रैल को हरियाणा के मानेसर औद्योगिक क्षेत्र से हुई, जहां ऑटोमोबाइल सेक्टर के श्रमिकों ने वेतन वृद्धि और बेहतर कार्य-शिफ्ट की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। इसके बाद मंगलवार को नोएडा के सेक्टर-62 में भी श्रमिकों का गुस्सा फूट पड़ा, जहां बड़ी संख्या में मध्यम उद्योग स्थित हैं और स्थिति हिंसक हो गई। केंद्र सरकार इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।

सूत्रों के अनुसार सरकार इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं श्रम संहिताओं को लेकर गलत जानकारी फैलाकर श्रमिकों को भड़काया तो नहीं जा रहा। हालांकि, इस पर श्रम मंत्रालय की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। श्रमिकों का आरोप है कि महंगाई तेजी से बढ़ी है, खासकर पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चलते, लेकिन उनके वेतन में उसके अनुरूप बढ़ोतरी नहीं हुई। नई श्रम संहिताओं के बाद वेतन संरचना में बदलाव से भी उनकी आय पर असर पड़ा है, जो बढ़ते खर्चों के सामने अपर्याप्त साबित हो रही है। भारतीय ट्रेड यूनियन के एक पदाधिकारी ने कहा कि वेतन और शिफ्ट जैसे मुद्दे प्रमुख हैं और इस समय सरकार के साथ बातचीत जारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने कई श्रमिक नेताओं को नजरबंद कर रखा है। 

नोएडा में यूनियन के जिला सचिव गंगेश्वर दत्त शर्मा को भी नजरबंद किए जाने की बात सामने आई थी। प्रशासन ने श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों और फैक्ट्री प्रबंधन के साथ वार्ता शुरू कर दी है। उद्योगपतियों का कहना है कि कच्चे माल की लागत बढ़ने से उत्पादन पर असर पड़ा है, जिससे वेतन बढ़ाना उनके लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है। विवाद की जड़ न्यूनतम वेतन में नियमित संशोधन को लेकर बताई जा रही है, जो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जुड़ा होता है और आमतौर पर साल में दो बार अप्रैल और अक्टूबर में संशोधित किया जाता है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार शाम एनसीआर क्षेत्र के श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन बढ़ाने की अधिसूचना जारी की है। 

औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार ने बताया कि हालिया घटनाक्रमों की समीक्षा के बाद सरकार ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए यह फैसला लिया है, जिससे श्रमिकों को तत्काल राहत मिल सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि 20,000 मासिक न्यूनतम वेतन लागू होने की खबरें पूरी तरह भ्रामक और निराधार हैं। अंतरिम वेतन वृद्धि के तहत अकुशल श्रमिकों का वेतन 11313 से बढ़ाकर 13690, अर्धकुशल श्रमिकों का 12445 से बढ़ाकर 15059 तथा कुशल श्रमिकों का 13940 से बढ़ाकर 16868 कर दिया गया है। फिलहाल, केंद्र और राज्य सरकारें स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं और वार्ता के जरिए समाधान निकालने की कोशिश जारी है। 

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