बजट मिला फिर भी लागू नहीं कर पाए HIS: कैंसर संस्थान में ओपीडी पंजीकरण, भर्ती-डिस्चार्ज प्रक्रिया नहीं हो सकी ऑनलाइन
लखनऊ, अमृत विचार : चक गंजरिया स्थित कल्याण सिंह कैंसर संस्थान को टाटा मॉडल पर विकसित करने की योजना को बड़ा झटका लगा है। यहां हॉस्पिटल इनफॉरमेशन सिस्टम (एचआईएस) लागू करने में अधिकारियों ने सुस्ती दिखाई, जिससे ज्यादातर कार्य मैनुअल ही किए जा रहे हैं।
ओपीडी पंजीकरण से मरीजों की भर्ती और डिस्चार्ज प्रक्रिया तक ऑनलाइन नहीं हो सकी है। शहर के एक जागरूक नागरिक ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और विभागीय अधिकारियों से की तो संस्थान से रिपोर्ट तलब की गई है।
संस्थान में 300 से अधिक बेड पर मरीज भर्ती हैं और ओपीडी में भी प्रतिदिन 400 से ज्यादा मरीज पहुंचते हैं। पंजीकरण, जांच रिपोर्ट, भर्ती और डिस्चार्ज जैसी सेवाओं को ऑनलाइन करने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए शासन ने बजट भी जारी कर दिया था, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण एचआईएस सिस्टम अब तक लागू नहीं हो पाया।
बताया जा रहा है कि एचआईएस के लिए कंपनी चयन के लिए टेंडर प्रक्रिया में भी अनावश्यक देरी की गई, जिससे कई वित्तीय वर्ष बीत गए। नतीजतन संस्थान डिजिटल व्यवस्था से वंचित रह गया। सुल्तानपुर रोड स्थित मयूरी कॉलोनी निवासी विनय अग्रवाल ने 2 अप्रैल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित घोष से इस लापरवाही की शिकायत की है। शिकायत का संज्ञान लेते हुए शासन ने 15 अप्रैल को अनुसचिव ज्ञानेंद्र कुमार शुक्ल के माध्यम से संस्थान के निदेशक से दो कार्यदिवस में रिपोर्ट तलब की है।
एचआईएस के फायदे
-अस्पताल के कामकाज को डिजिटल और सरल बनाता है
-मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री, जांच रिपोर्ट और इलाज का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखता है
-डॉक्टरों को रियल-टाइम डेटा मिलने से बेहतर और त्वरित निर्णय संभव
-कागजी कार्यवाही कम होने से समय और संसाधनों की बचत
-बेड, बिलिंग, दवाओं और स्टाफ प्रबंधन में आसानी
-मरीजों को जल्दी रजिस्ट्रेशन, कम इंतजार और बेहतर सेवा का लाभ
