महिला आरक्षण बिल पर लोकसभा में बोले पीएम मोदी- विरोध करने वालों को लंबे वक्त तक चुकानी पड़ेगी इसकी कीमत

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को लोकसभा में सभी राजनीतिक दलों से महिला आरक्षण अधिनियम संबंधी संविधान संशोधन विधेयक का समर्थन करने की अपील करते हुए कहा कि इसे राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं है और जो भी इसका विरोध करेंगे उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।

उन्होंने महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026', 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' पर यह भी कहा कि इस विषय को राजनीति के तराजू से नहीं तौलना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा, ''राष्ट्र के जीवन में कुछ महत्वपूर्ण पल आते हैं और उस समय समाज की मन:स्थिति और नेतृत्व क्षमता उस पल को 'कैप्चर' करके एक राष्ट्र की अमानत और धरोहर बना देती है। संसदीय इतिहास में आज ऐसा ही एक पल है।''

मोदी ने कहा, ''...महिला को मिलने वाले अधिकार का जिस-जिस ने विरोध किया, महिलाओं ने उन्हें माफ नहीं किया, उनका बुरा हाल हुआ। 2024 के चुनाव में यह नहीं हुआ, क्योंकि (2023 में) सबने मिलकर इसे पारित किया था।'' उन्होंने कहा कि जिन्हें इसमें राजनीतिक बू आ रही है, वे पहले के परिणामों को देख लें। उन्होंने कहा, ''मैं समझता हूं कि इसे राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं है।'' मोदी ने कहा, ''....जो विरोध करेंगे उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।''  

पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्र के जीवन में कुछ बड़े पल आते हैं उस समय समाज की मनोस्थिति एक मजबूत धरोहर तैयार कर देती हैं। मैं समझता हूं संसद के इतिहास में ये वैसे ही पल हैं। आवश्यकता यही थी कि 25 से 30 साल पहले जब ये विचार सामने आया।  जरूरत महसूस हुई तब इसे लागू कर देते और आज तक इसे परिपक्वता तक पहुंचा देते। हम मदर ऑफ डेमोक्रेसी रहे हैं। हमारी हजार साल की विकास यात्रा रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि महिला आरक्षण को राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं है, अतीत में जिन्होंने विरोध किया, महिलाओं ने उन्हें माफ नहीं किया। इससे पहले लोकसभा में महिलाओं के आरक्षण और परिसीमन से जुड़े अहम विधेयकों पर गुरुवार को चर्चा शुरू हुई। केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 देश में लैंगिक समानता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा और इससे किसी भी राज्य को नुकसान नहीं पहुंचेगा।

 

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