Bareilly: मनरेगा का नाम बदला...नहीं बदली मजदूरों की किस्मत
बरेली, अमृत विचार। केंद्र सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर ''''वीबी जी रामजी'''' कर दिया, लेकिन यह बदलाव मजदूरों के चूल्हे जलाने में नाकाम साबित हो रहा है। शासन की ओर से इस नई योजना को लेकर अब तक कोई स्पष्ट गाइडलाइन जारी नहीं की है। इससे कार्ययोजनाएं ठप पड़ी हैं। खड़ंजा, नाली, आंगनबाड़ी केंद्र और खेल मैदान जैसे 266 प्रकार के कार्यों पर पूरी तरह से ब्रेक लगा हुआ है।
बीते दिनों मनरेगा में नाम के बदलाव के साथ ही दावा किया गया था कि योजना में कार्य दिवसों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 कर दी है, प्रशासनिक मद को भी छह से बढ़ाकर नौ प्रतिशत किया है, लेकिन धरातल पर यह दावे पूरी तरह खोखले नजर आ रहे हैं। जनपद में करीब दो लाख सक्रिय मनरेगा मजदूर काम की आस में बैठे हैं, मगर नई वित्तीय कार्ययोजना न बनने से उन्हें रोजगार नहीं मिल पा रहा है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस वित्तीय वर्ष में अभी तक एक भी नया काम शुरू नहीं हो सका है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था चरमराने लगी है। वहीं, मजदूरों की बदहाली का आलम यह है कि 8 जनवरी से उनके खातों में कोई भुगतान नहीं पहुंचा है। हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। मजदूरी ही नहीं, बल्कि वर्ष 2025-26 के मटेरियल भुगतान का करीब 49 करोड़ रुपया भी अटका हुआ है। काम कराने वाले वेंडर्स और प्रधान भुगतान के इंतजार में कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं।
डीसी मनरेगा मो. हसीब अंसारी ने बताया कि वीबी-जी-रामजी को लेकर शासन से कोई गाइडलाइन जारी नहीं की गई है। उम्मीद है जल्द ही नई गाइडलाइन आएगी, इसके बाद ही कार्ययोजना बनाकर काम शुरू कराया जा सकेगा
