ट्रंप की रणनीतिक विफलता और भविष्य के संकेत

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Published By Deepak Mishra
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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध विराम की अवधि बढ़ाने की घोषणा से ईरान से आमने-सामने की बातचीत का एक नया दौर आयोजित करने के लिए अतिरिक्त समय मिल जाएगा, लेकिन दोनों के बीच हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं।

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विवेक सक्सेना, अयोध्या

 

अप्रैल 2026 के भू-राजनीतिक परिदृश्य में, डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ घोषित युद्ध विराम ने अमेरिकी विदेश नीति की एक बड़ी विफलता को उजागर किया है। ‘पूर्ण जीत’ और ईरान की सैन्य शक्ति को ‘पूरी तरह से नष्ट’ करने के शुरुआती बड़बोले दावों के बाद, यह युद्ध विराम ट्रंप प्रशासन के लिए एक शर्मनाक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। यह संघर्ष न केवल मध्य पूर्व में स्थिरता लाने में विफल रहा, बल्कि इसने अमेरिकी कूटनीति की सीमाओं को भी उजागर किया है। 

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध में युद्ध विराम की अवधि बढ़ाने की घोषणा से मध्यस्थों को अमेरिका और ईरान के बीच आमने-सामने की बातचीत का एक नया दौर आयोजित करने के लिए अतिरिक्त समय मिल जाएगा, लेकिन हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं। अमेरिका और इज़राइल ने 28 फरवरी को युद्ध शुरू किया, जिसके कारण तेल की कीमतें बढ़ गईं और वैश्विक अर्थव्यवस्था हिल गई। इस युद्ध ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को बाधित किया है, जिससे ईंधन की कीमतें बढ़ने और अन्य देशों में भी बिजली संयंत्रों पर हमले का खतरा पैदा हो गया। 

ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिका ने ईरान के परमाणु और मिसाइल ढांचे को नष्ट कर दिया है, लेकिन हकीकत यह रही कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए रखा और अमेरिकी धमकियों को नजरअंदाज करते हुए जवाबी हमले जारी रखे। 48 घंटे के अल्टीमेटम के बाद जब युद्ध विराम की घोषणा की गई, तो यह जीत से ज्यादा एक सामरिक वापसी और ईरान के सामने झुकने जैसा प्रतीत हुआ। ईरान ने स्पष्ट किया कि उसने कोई युद्ध विराम नहीं मांगा था, जिससे ट्रंप के दावों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठे हैं। 

इस घोषणा से अस्थायी रूप से लड़ाई फिर से शुरू होने से तो बच गई, लेकिन दोनों पक्षों के बीच व्यापक मतभेद बने हुए हैं। ईरान, इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच मौजूदा युद्ध विराम आठ अप्रैल को शुरू हुआ, जो ट्रंप द्वारा कई बार समय सीमा तय किए जाने के बाद हुआ। ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता का पिछला दौर पाकिस्तान में आयोजित किया गया था। अमेरिकी वार्ता दल का नेतृत्व कर रहे उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद अमेरिका और ईरान के बीच हुई उच्चतम स्तरीय वार्ता में भाग लिया, जो बिना किसी समझौते के समाप्त हुई। 

वैंस की पाकिस्तान यात्रा अभी भी स्थगित है और ईरान पर अमेरिका की नाकाबंदी जारी है। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने मौजूदा युद्ध विराम की समय सीमा समाप्त होने से कुछ ही घंटे पहले पाकिस्तान के अनुरोध पर यह कदम उठाया, क्योंकि वह ईरान से ‘एकीकृत प्रस्ताव’ की प्रतीक्षा कर रहे हैं और अनिर्णय के लिए ईरान के ‘गंभीर रूप से विभाजित’ नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया। इन सब के बीच दो क्षेत्रीय अधिकारियों ने मंगलवार को एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि अमेरिका और ईरान ने वार्ता के एक नए दौर के आयोजन के संकेत दिए हैं। 

पाकिस्तान के नेतृत्व वाले मध्यस्थों को इस बात की पुष्टि मिली है कि शीर्ष वार्ताकार, वैंस और ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर क़लीबाफ़, अपनी-अपनी टीमों का नेतृत्व करेंगे, लेकिन मंगलवार देर रात, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि सम्मेलन में भाग लेने के बारे में कोई ‘अंतिम निर्णय’ नहीं लिया गया है। प्रवक्ता, इस्माइल बगाई ने सरकारी टीवी को बताया कि निर्णय न ले पाने का कारण अमेरिकियों की ओर से ‘विरोधाभासी संदेश’ और ‘अस्वीकार्य कार्रवाइयां’, विशेष रूप से ईरान की अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी है। 

यदि पाकिस्तान बैठक आयोजित करने में सफल भी हो जाता है, तो भी होर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और नाकाबंदी को लेकर गंभीर चुनौतियां बनी रहेंगी। सप्ताहांत में ईरान ने जलडमरूमध्य में जहाजों को निशाना बनाया। अमेरिका ने भी जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी से बचने की कोशिश कर रहे एक ईरानी जहाज पर हमला किया और उसे अपने कब्जे में ले लिया, जिससे संकेत मिलता है कि स्थिति अभी भी अस्थिर बनी हुई है। ईरान का सारा उच्च संवर्धित यूरेनियम अभी भी देश में ही है, संभवतः उन संवर्धन स्थलों में दबा हुआ है, जिन पर पिछले साल जून में 12 दिनों के युद्ध के दौरान अमेरिका ने बमबारी की थी। 

ईरान का कहना है कि उसे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए ऐसा करने का अधिकार है और वह परमाणु हथियार बनाने की कोशिश से इनकार करता है, जबकि ट्रंप ने इज़राइल के साथ मिलकर ईरान से अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से समाप्त करने और अपने भंडार को छोड़ने का आह्वान किया है। ईरान ने युद्ध समाप्त करने के अपने 10 सूत्री प्रस्ताव में इसे खारिज कर दिया। इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता होने वाली थी, लेकिन ईरान का प्रतिनिधिमंडल नहीं पहुंचा। अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस की अगुवाई में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को पाकिस्तान रवाना होने वाला था, ऐसा नहीं हुआ।

वहीं युद्ध विराम ख़त्म होने से पहले ही ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर इसकी समय सीमा बढ़ाने की घोषणा की। कहा कि यह फ़ैसला पाकिस्तान के अनुरोध पर लिया गया, ‘हमसे कहा गया है कि हम ईरान पर अपना हमला तब तक रोकें, जब तक उसके नेता और प्रतिनिधि एक साझा प्रस्ताव लेकर नहीं आते।’ इसके कुछ घंटे बाद ही, बुधवार को ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने तीन कार्गो जहाज़ों पर हमला कर दो को सीज़ कर लिया। इनमें एक पर ग्रीस का और दूसरे पर पनामा का झंडा लगा था, जबकि तीसरा जहाज़ यूएई की एक कंपनी का है। फारस की खाड़ी का संकरा मुहाना, होर्मुज जलडमरूमध्य, जिससे होकर 20 फीसदी प्राकृतिक गैस और तेल का परिवहन होता है, जलमार्ग में ईरानी हमलों के कारण लगभग बंद है। 

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