यूपी में ‘महिला सामर्थ्य’ योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा, एक लाख महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर
लखनऊ, अमृत विचार: योगी सरकार की ‘महिला सामर्थ्य’ योजना अवध क्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही है। अयोध्या, सुल्तानपुर, रायबरेली, अमेठी, प्रतापगढ़, फतेहपुर और कानपुर नगर के 1500 से अधिक गांवों में इस योजना के तहत एक लाख से ज्यादा महिलाएं आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। वहीं लखनऊ, उन्नाव और बाराबंकी में इसका तेजी से विस्तार किया जा रहा है।
योजना के तहत एक मजबूत डेयरी नेटवर्क खड़ा हुआ है, जिसमें जुड़ी महिलाएं रोज करीब 4 लाख लीटर दूध का संग्रह कर रही हैं। अब तक 1380 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे लाभार्थी महिलाओं के बैंक खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है, जिससे उनकी आय में स्थायी वृद्धि हुई है। सुल्तानपुर के मुकुंदपुर गांव की अनीता वर्मा इस योजना की मिसाल बनकर उभरी हैं।
दो गायों से शुरू किया गया उनका छोटा प्रयास आज उन्हें सालाना लाखों की आय दिला रहा है और वे अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं। यह योजना साबित कर रही है कि सही अवसर और सरकारी सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर भी बदल सकती हैं।
आत्मनिर्भर महिला, सशक्त परिवार
मुख्यमंत्री योगी का मानना है कि महिलाओं की आर्थिक मजबूती ही समाज की असली ताकत है। इसी सोच के साथ योजना में महिलाओं को उत्पादन, संग्रहण और विपणन की पूरी प्रक्रिया से जोड़ा गया है, जिससे वे खुद निर्णय लेने में सक्षम हो रही हैं।
8000 से एक लाख तक का सफर
मार्च 2023 में 340 गांवों और 8000 महिलाओं से शुरू हुआ यह अभियान अब 1550 गांवों और एक लाख से अधिक महिलाओं तक पहुंच चुका है। डेयरी व्यवसाय का यह विस्तार ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए नया मॉडल बनकर उभरा है।
डीबीटी से खत्म हुआ बिचौलिया तंत्र
डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए भुगतान सीधे महिलाओं के खातों में जा रहा है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है, जिससे महिलाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
