AAP का राज्यसभा में 'पावर सरेंडर':स्वाति मालीवाल के विवाद से लेकर राघव चड्ढा तक... जानें कैसे टूटा आम आदमी पार्टी का तैयार प्लॉट?
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के लिए शुक्रवार का दिन किसी राजनीतिक 'ब्लैक फ्राइडे' से कम साबित नहीं हुआ। संसद के उच्च सदन में पार्टी की रीढ़ माने जाने वाले 10 में से 7 सांसदों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। इस बड़े दलबदल ने न केवल राज्यसभा में AAP के कुनबे को छोटा कर दिया है, बल्कि अरविंद केजरीवाल के राष्ट्रीय विस्तार के सपनों पर भी बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
इन दिग्गजों ने बदला पाला
पार्टी छोड़ने वाले सात चेहरों में वे नाम शामिल हैं जो कभी केजरीवाल के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार हुआ करते थे:
1. राघव चड्ढा (कभी पार्टी के पोस्टर बॉय रहे)
2. संदीप पाठक (संगठन के चाणक्य माने जाने वाले)
3. स्वाति मालीवाल (पूर्व DCW चीफ)
4. हरभजन सिंह (पूर्व क्रिकेटर)
5. अशोक मित्तल
6. विक्रम साहनी
7. राजेंद्र गुप्ता
बगावत की पटकथा: मालीवाल कांड और राघव की नाराजगी
जानकारों की मानें तो इस टूट की नींव उसी दिन पड़ गई थी, जब स्वाति मालीवाल ने मुख्यमंत्री आवास पर अपने साथ हुई बदसलूकी का मुद्दा उठाया था। स्वाति ने इस्तीफे के बाद "भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी" का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी अब अपराधी तत्वों के संरक्षण का केंद्र बन गई है।
वहीं, राघव चड्ढा की विदाई को उनके 'पद घटाने' से जोड़कर देखा जा रहा है। हाल ही में उन्हें राज्यसभा में उपनेता पद से मुक्त किया गया था, जिसके बाद उन्होंने संकेत दिया था कि 'शांत नदी' कभी भी बाढ़ का रूप ले सकती है। आज उनका बीजेपी में जाना AAP के लिए सबसे बड़ी रणनीतिक हार माना जा रहा है।
ED का साया या 'ऑपरेशन लोटस'?
इस सामूहिक इस्तीफे पर राजनीति गरमा गई है। AAP नेता संजय सिंह ने इसे बीजेपी का 'ऑपरेशन लोटस' करार देते हुए कहा कि जांच एजेंसियों (ED-CBI) के डर से सांसदों को तोड़ा गया है। गौरतलब है कि इस्तीफा देने वाले सांसदों में से एक, अशोक मित्तल के ठिकानों पर हाल ही में ED ने फेमा (FEMA) मामले में छापेमारी की थी।
पंजाब की पकड़ और भविष्य पर संकट
स्वाति मालीवाल को छोड़कर बाकी सभी 6 बागी सांसद पंजाब कोटे से थे। ऐसे में पंजाब में भगवंत मान सरकार और पार्टी के संगठन के लिए यह बहुत बड़ा झटका है। अगले साल होने वाले गुजरात और गोवा विधानसभा चुनावों से ठीक पहले इस आंतरिक कलह ने AAP को बैकफुट पर ला खड़ा किया है।
राज्यसभा में अब AAP महज 3 सांसदों तक सिमट गई है। वह पार्टी जो कभी भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से निकली थी, आज अपने ही साथियों के गंभीर आरोपों और बगावत के भंवर में फंसी नजर आ रही है।
