लखनऊ में जाम की समस्या का कारण बने ई-रिक्शा, कागजाें तक सिमटकर रह गई जोन व्यवस्था
परिवहन विभाग और नगर निगम ने जोन वार संचालन के लिए तैयार की थी योजना
लखनऊ, अमृत विचारः शहर में जाम की समस्या का कारण बने ई-रिक्शा संचालन को व्यवस्थित करने के लिए बनाई गई जोन व्यवस्था कागजाें तक सिमटकर रह गई। संचालन तो बेतरतीब हो ही रहा है, बड़ी संख्या में ई-रिक्शा नाबालिग भी चला रहे हैं। इस कारण आए दिन हादसे भी होते रहते हैं।
करीब दो वर्ष पहले नगर निगम और यातायात पुलिस ने ई-रिक्शा संचालन को व्यवस्थित करने के लिए शहर को 16 जोन में बांटा था। ई-रिक्शा के रूट निर्धारित कर संबंधित रूटों के स्टीकर लगाने के निर्देश तक दे दिए गए थे। 11 जून 2024 से 10 जुलाई 2024 तक स्टिकर और बारकोड लगाने के डेड लाइन तय की गई थी। किंतु रूट निर्धारण और स्टिकर लगाने की योजना पर अमल नहीं किया जा सका।
शहर के भीड़ भाड़ वाले इलाकों और चौराहों तक ई-रिक्शा खड़े रहते हैं, जिससे जाम लगता है। प्रमुख अस्पताल वाले चौराहों ई-रिक्शा चालकों की मनमानी भी परेशानी का कारण बनी है।
कैसरबाग, अमीनाबाद, चौक, रकाबगंज, ठाकुरगंज, नक्खास राजाजीपुरम, आलमबाग, तेलीबाग, चारबाग,अवध चौराहा, कैसरबाग, हजरतगंज और मड़ियांव जैसे इलाकों में ई-रिक्शा चालकों के कारण यातायात व्यवस्था तो चरमरा ही गई है।
ई रिक्शा चलाने वालों पर नाबालिगों पर कार्रवाई की जाती है। ई-रिक्शा को परमिट के दायरे में लाने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यालय से जो आदेश मिलेगा उसी के अनुसार कार्य किया जाएगा।-प्रभात पाण्डेय, आरटीओ, प्रवर्तन
ये भी पढ़ें :
बलरामपुर-बिजनौर में पर्यटन विकास को नई गति, 909 लाख की 8 परियोजनाएं स्वीकृत, कई धार्मिक स्थलों का होगा कायाकल्प
