बुद्ध पूर्णिमा पर प्रयागराज-वाराणसी के घाटों पर उमड़ा आस्था का सैलाब, सारनाथ पहुंचे कई देशों और राज्यों से श्रद्धालु

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Published By Anjali Singh
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प्रयागराज/वाराणसी। संगम नगरी प्रयागराज में बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला, जहां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के त्रिवेणी संगम पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। तड़के सुबह से ही हजारों श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। संगम तट पर श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर रहे हैं तथा दान-पुण्य भी कर रहे हैं। पूरे क्षेत्र में धार्मिक उल्लास और श्रद्धा का वातावरण बना हुआ है।

प्रशासन द्वारा भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। वैशाख मास की पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था और बोधगया में पीपल के वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। 

यही नहीं, इसी दिन कुशीनगर में उन्होंने महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था। बुद्ध पूर्णिमा का यह पावन पर्व विश्वभर में बौद्ध धर्मावलंबियों द्वारा भगवान बुद्ध की जयंती के रूप में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। प्रयागराज में भी श्रद्धालु इस अवसर पर पवित्र गंगा में स्नान कर आध्यात्मिक पुण्य अर्जित कर रहे हैं। 

शांति का पैगाम लिए सारनाथ पहुंचे हजारों की संख्या में श्रद्धालु 

विश्व में जारी युद्ध और व्याप्त अशांति के बीच, धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी में बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर सारनाथ में हजारों की संख्या में श्रद्धालु शांति का पैगाम लिए भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि अवशेष के दर्शन-पूजन कर रहे हैं। भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ 'मूलगंध कुटी विहार' परिसर और मंदिर को भव्य तरीके से सजाया गया है। यहां फहरते पंचशील के झंडे विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। 

वैशाख पूर्णिमा का दिन भगवान बुद्ध के जीवन के तीन महत्वपूर्ण पड़ावों से जुड़ा है। आज ही के दिन उनका जन्म हुआ था, आज ही उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी और इसी तिथि को उनका महापरिनिर्वाण हुआ था। बौद्ध अनुयायी भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि अवशेष के दर्शन करने के साथ ही सारनाथ के अन्य मंदिरों में भी पूजन कर रहे हैं। मूलगंध कुटी विहार में बुद्ध पूर्णिमा के उपलक्ष्य में विशेष आयोजन किए जा रहे हैं। 

सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन

दोपहर बाद यहां धम्म सभा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। इसके अतिरिक्त, कचहरी से सारनाथ तक 'धम्म यात्रा' भी निकाली जाएगी। सायंकाल मूलगंध कुटी मंदिर को हजारों दीपकों से आलोकित किया जाएगा। सारनाथ में थाईलैंड, म्यांमार, कंबोडिया, भूटान, श्रीलंका और जापान समेत कई देशों से श्रद्धालु पहुंचे हैं। वहीं, भारत के मुंबई, दिल्ली, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे विभिन्न राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग दर्शन-पूजन के लिए आ रहे हैं। 

भूटान और थाईलैंड से सर्वाधिक आए पर्यटक-श्रद्धालु 

टूरिस्ट गाइड रोहित केसरवानी ने बताया कि इस वर्ष भूटान और थाईलैंड से सर्वाधिक पर्यटक और श्रद्धालु आए हैं। पवित्र अस्थि अवशेष के दर्शन के साथ-साथ काशी के गंगा घाट और शहर भ्रमण की योजना लेकर ये लोग वाराणसी आते हैं। इनमें कई ऐसे समूह हैं, जो प्रतिवर्ष इसी समय यहाँ आते हैं। धम्म शिक्षण केंद्र के प्रभारी भन्ते चन्दीमा ने बताया कि महाबोधि सोसाइटी द्वारा श्रद्धालुओं के लिए भोजन (प्रसाद) की भी समुचित व्यवस्था की गई है। 

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