नेपाल : बालेन सरकार और जनता के सरोकार
नेपाल में जनता से जुड़े मुद्दों के समाधान में तेजी तो आई है, लेकिन जनता से ही जुड़े कई अहम सरोकारों में बाधा भी आई है। इससे लोग परेशान हैं।
इसमें दो राय नहीं कि बालेन सरकार नेपाल को नया बनाने की दिशा में बहुत कुछ नया करना चाह रही है, लेकिन इसमें दुश्वारियां ढेर सारी है। बेशक उनके इस प्रयास की सराहना तो हो रही है, लेकिन एक बड़ा वर्ग नाराज भी हो रहा है। प्रतिनिधि सभा के चुनाव में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को एक तरफ़ जीत मिली है, जिसमें पहाड़ से लेकर मैदानी इलाकों तक का भरपूर जनसमर्थन रहा है। बालेन सरकार इसी पार्टी से प्रधानमंत्री का चेहरा थे। निश्चित रूप से राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को मिले भारी जनादेश के पीछे बालेन शाह का चेहरा ही था।
उनके नेतृत्व में सरकार गठन के अभी महीना भर ही हुए हैं, इस बीच जनता से जुड़े मुद्दों के समाधान में तेजी तो आई है, लेकिन जनता से ही जुड़े दिनचर्या में बाधा भी आई है। इसमें एक तो भारत नेपाल सीमा के नेपाली नागरिकों के सीमावर्ती भारतीय बाजारों से रोजमर्रा के सामानों की खरीदारी को नितांत सीमित कर देना है। इससे भारत सीमा से सटे नेपाली नागरिकों के समक्ष संकट खड़ा हो गया है। नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों के गरीब और मध्यम वर्गीय लोगों का जनजीवन प्रभावित हुआ है, हालांकि नेपाल उच्च न्यायालय ने दायर एक याचिका का संज्ञान लेते हुए इस पर सरकार से जवाब मांगा है।
जनता से ही जुड़ा इससे भी बड़ा मामला अतिक्रमण के नाम पर मकानों के ध्वस्तीकरण का है। बता दें कि काठमांडू सहित नेपाल के विभिन्न हिस्सों में चौड़ीकरण के नाम पर अवैध मकानों और बस्तियों को बुलडोजर से ढहाया जा रहा है। सरकार के इस निर्णय पर नेपाली कांग्रेस की ओर से आई प्रतिक्रिया में कहा गया है कि जेन जी के हिंसक और उग्र आंदोलन के समय राजधानी में कई सारी सरकारी इमारतें, होटल और व्यवसायिक प्रतिष्ठान आग के हवाले हुए थे, बालेन सरकार जरा भी संवेदनशील होती, तो पहले छतिग्रस्त इमारतों के निर्माण पर ध्यान देती, लेकिन यहां तो अजीब हाल है, निर्माण को दरकिनार कर विध्वंस को प्राथमिकता दी जा रही है।
काठमांडू के मनोहरा क्षेत्र में भारी पुलिस बल और सेना की घेरेबंदी में सुकुंबासी बस्ती पर सरकारी बुलडोज़र चलाया गया। इस घटना से पूरे इलाके में तनाव का माहौल है, वहीं स्थानीय लोगों के विरोध और प्रशासन की सख्ती के बीच हालात बेहद संवेदनशील बने रहे। राजधानी और इसके पहले वीरगंज और कुछ अन्य इलाकों में तोड़फोड़ की घटना को बेहद तकलीफदेह बताते हुए नेपाली कांग्रेस के सांसद अभिषेक प्रताप शाह ने बालेन सरकार पर निशाना साधा है।
नेपाल में अतिक्रमणकारियों को सुकंबासी कहा जाता है। इसका अर्थ भू स्वामित्व के बिना संपत्ति पर कब्जा करना होता है। नेपाल में ऐसे लोगों की संख्या करीब तीस लाख से अधिक है, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि जो लोग पीढ़ियों से वैध कागजात के साथ अपने मकान में रह रहे हैं, उनके मकानों को भी 12 घंटे की मोहलत देकर ध्वस्त कर दिया जा रहा है। बालेन सरकार का शहर के बीचोबीच 50 मीटर चौड़ा राजमार्ग निकालने का निर्णय समझ से परे है। अमूमन ऐसे राजमार्ग शहर के बाहरी हिस्से से निकाले जाते हैं। बालेन सरकार के इस फैसले से काठमांडू ही नहीं, नेपाल के लगभग सभी प्रमुख शहरों के प्रभावित होने का खतरा है।
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह, जो पहले काठमांडू महानगर के मेयर रह चुके हैं, लंबे समय से शहर के भीतर फैली अवैध बस्तियों को हटाने के पक्ष में रहे हैं। मेयर रहते हुए उन्होंने काठमांडू क्षेत्र के थापाथली क्षेत्र में कई बार अवैध बस्ती हटाने की कोशिश की थी, लेकिन स्थानीय लोगों के कड़े विरोध के कारण उन्हें सफलता नहीं मिल सकी थी। अब प्रधानमंत्री बनने के बाद बालेन शाह ने वही अभियान और अधिक सख्ती के साथ आगे बढ़ाया है। अब चूंकि गृह मंत्रालय भी उनके हाथ में है, इसलिए प्रशासनिक निर्णयों में तेजी आई है।
गृह मंत्रालय की कमान संभालते ही प्रधानमंत्री ने काठमांडू के सुकुंबासी बस्तियों पर बुलडोज़र चलाने का बड़ा फैसला लिया। यह अभियान थापाथली और गैरीधारा में बिना किसी बड़े अवरोध के आगे बढ़ा, लेकिन मनोहरा में लोगों का तीखा विरोध देखने को मिला। यह अभियान अब देशभर में फैल सकता है। नुवाकोट में भी इसी तरह की कार्रवाई शुरू हो चुकी है, जबकि पोखरा में भी बुलडोज़र चलाने की तैयारी की खबरें सामने आ रही है। सरकार के इस कदम को जहां शहरी विकास और कानून व्यवस्था की दिशा में बड़ा निर्णय माना जा रहा है, वहीं प्रभावित लोगों के पुनर्वास और मानवीय पहलुओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
बताते हैं कि इस अभियान में जाने-अनजाने भारतीय मूल के लोगों को ज्यादा नुक्सान उठाना पड़ रहा है। जेन जी आंदोलन में सत्ता और विपक्षी नेताओं से अधिक वहां के व्यापारियों को निशाना बनाया गया था। काठमांडू के नवनिर्मित मारवाड़ी परिषद के विशाल भवन को आग के हवाले कर दिया गया था। नेपाल में मारवाड़ी समुदाय का इतिहास बहुत पुराना है। इन्हें राजाओं ने व्यापार बढ़ाने के लिए राजस्थान से आमंत्रित किया था। आज वे नेपाल के आर्थिक विकास में बड़ा योगदान दे रहे हैं। (यह लेखक के निजी विचार हैं)
