राजनीति की दशा और दिशा बदलने की युवा सोच

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Published By Deepak Mishra
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युवा वर्ग करप्शन फ्री इंडिया चाहता है और इन्हीं में से एक समूह वर्तमान राजनीतिक हालात पर असंतोष जताता है, तो हमारी यह जिम्मेदारी बनती है कि उसे राजनीति की अच्छाई से अभी अवगत कराया जाए। कुछ अलग पॉजिटिव-क्रिएटिव करने को उत्साहित करें।  

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अजय दयाल, हल्द्वानी

 

शरीर के मुकाबले सोच युवा हो तो जमाना कभी नहीं गुजरता। हर दिन नया करना और सीखना ही जिंदगी जीने का दूसरा नाम है। इंजीनियरिंग, चिकित्सा, कानून, उद्यम से अलग राजनीतिक में भी भविष्य बनाने का जज़्बा युवाओं में कम नहीं है। सोच राजनीति की दशा और दिशा बदलने की है। वैसे, दक्षिण एशिया के दो प्रमुख युवाओं के नाम इन दिनों चर्चा में हैं। हाल ही में टाइम मैगजीन की 2026 की 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में दक्षिण एशिया के दो प्रमुख युवा नेताओं को शामिल किया गया। दोनों अपने-अपने देशों में सबसे युवा प्रधानमंत्री के रूप में उभरे हैं। एक हैं बालेन शाह और दूसरे हैं तारिक रहमान। बीते दिनों जहां बालेन शाह नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने, वहीं तारिक रहमान ने भी बतौर सबसे युवा प्रधानमंत्री बांग्लादेश का नेतृत्व संभाला है।

जमीनी हकीकत यह है कि लोकतांत्रिक देशों में राजनीतिक दलों के बिना सरकार का कोई अस्तित्व नहीं है। युवा नेतृत्व से राजनीति की दशा और दिशा बदल सकती है। कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता युवा वर्ग की पहचान कराती है। अपने देश की बात करें तो अगर युवा वर्ग करप्शन फ्री इंडिया चाहता है और इन्हीं में से एक समूह वर्तमान राजनीतिक हालात पर असंतोष जताता है, तो हमारी यह जिम्मेदारी बनती है कि उसे राजनीति की अच्छाई से अभी अवगत कराया जाए। राजनीति में परिवारवाद एवं जातिवाद के ही पहलू से अलग कुछ पॉजिटिव-क्रिएटिव कर गुजरने को उत्साहित करें।  

आंकड़ों पर गौर करें, तो पाएंगे कि भारत विश्व की सबसे बड़ी युवा जनसांख्यिकी (15-29 वर्ष) वाला देश है, जिसमें लगभग 35 करोड़ से अधिक युवा आबादी है। हालिया रिपोर्ट (2025-26) के अनुसार, मेरा युवा भारत पोर्टल पर 35 लाख से अधिक युवा पंजीकृत हैं। यह युवा शक्ति देश के लगभग 36 प्रतिशत सकल राष्ट्र आय में योगदान भी दे रही है। अगर राजनीतिक और सामाजिक सहभागिता पर चर्चा करें तो पाते हैं कि लगभग 30 प्रतिशत युवा सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए हुए हैं, जबकि 25 प्रतिशत बिना किसी दल से जुड़े राजनीतिक चर्चाओं में भाग लेते हैं। केवल 11 प्रतिशत ही किसी राजनीतिक दल के सक्रिय सदस्य हैं।

राजनीति के मुकाबले उद्यमशीलता में दिलचस्पी रखने वाले युवाओं की गणित भी समझिए। 49 प्रतिशत युवा सामाजिक उद्यमी बनना चाहते हैं, लेकिन 58 प्रतिशत को फंडिंग और 39 प्रतिशत को सही मार्गदर्शन की आवश्यकता महसूस होती है। जनसांख्यिकीय आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2021 में कुल जनसंख्या में 15-29 वर्ष के युवाओं की हिस्सेदारी 27.2 प्रतिशत थी, जो 2036 तक घटकर 22.7 प्रतिशत होने का अनुमान है। सर्वेक्षण कहते हैं कि युवा पारंपरिक राजनीति के बजाय मुद्दों पर आधारित राजनीति में अधिक रुचि रखते हैं। इसके अतिरिक्त, बेरोजगारी और सरकारी नौकरियों में अनियमितताएं युवाओं में बैठी चिंताएं हैं, जो उन्हें मुख्यधारा की राजनीति से दूर करती हैं।

वैश्विक राजनीति में युवा नेतृत्व एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है, जहां युवा अब केवल वोटर नहीं, बल्कि नीति-निर्माता और परिवर्तन के वाहक के रूप में भी आगे आ रहा है। यह परिदृश्य पारंपरिक राजनीति से आधुनिक और नवीन दृष्टिकोण की ओर बढ़ रहा है। वैश्विक परिदृश्य का आकलन करें, तो देखेंगे कि युवाओं की राजनीतिक भागीदारी तो बढ़ी है और बतौर जनप्रतिनिधि ऐसे युवा जलवायु परिवर्तन, शिक्षा, रोजगार और सतत विकास जैसे मुद्दों पर सक्रिय रूप से काम भी कर रहे हैं। इसी कड़ी में यह जोड़ना आवश्यक है कि दुनिया भर में 30-40 वर्ष की आयु वाले युवा शीर्ष पदों पर पहुंच रहे हैं।

उदाहरण के लिए, फिनलैंड में सना मरीन (34 वर्ष में पीएम), न्यूजीलैंड में जसिंडा आर्डन (37 वर्ष में पीएम) और डेनमार्क में मेटे फ्रेडरिकसन (41 वर्ष में पीएम) ने युवा नेतृत्व की क्षमता को दर्शाया है। इतना ही नहीं, संयुक्त राष्ट्र ने भी शासन और नीति-निर्माण प्रक्रियाओं में युवाओं की भागीदारी को औपचारिक रूप से मान्यता दी है, जो 2030 के एजेंडे को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है। गहराई से देखें तो, 15-25 वर्ष की आयु के लोग दुनिया की आबादी का पांचवां तो हैं, फिर भी वैश्विक स्तर पर सांसदों की औसत आयु 53 वर्ष है।

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