बिना कर्ज के पूरा हुआ गंगा एक्सप्रेस-वे, मुख्यमंत्री योगी ने गिनाईं 'बीमारू' से 'सरप्लस' राज्य बनने की उपलब्धियां
-योगी ने नवचयनित 500 लेखा परीक्षकों को बांटे नियुक्ति पत्र, वित्तीय अनुशासन पर जोर -नौ वर्षों में ‘बीमारू’ से रेवेन्यू सरप्लस राज्य बना, बजट व प्रति व्यक्ति आय हुई तीन गुना
लखनऊ, अमृत विचार: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को अपने संसाधनों से पूरा करने में सक्षम हो चुका है। गंगा एक्सप्रेस-वे का निर्माण बिना किसी बैंक कर्ज के पूरा किया गया, जिस पर कुल 42 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए हैं। योगी ने नौ वर्षों में ‘बीमारू’ से रेवेन्यू सरप्लस राज्य बने यूपी की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि वित्तीय अनुशासन और बेहतर प्रबंधन से बजट और प्रति व्यक्ति आय में तीन गुना वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री योगी सोमवार को लोकभवन में आयोजित सहकारी समितियां एवं पंचायत लेखा परीक्षा विभाग के लिए नवचयनित 371 लेखा परीक्षकों समेत स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग के लिए नवचयनित 129 लेखा परीक्षकों के नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि 2017 में सरकार बनने के समय प्रदेश की आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण थी और बैंक भी कर्ज देने को तैयार नहीं थे।
ऐसे समय में सरकार ने अपने संसाधनों को बढ़ाने, वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने और बेहतर प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने कहा कि यदि अनियंत्रित खर्च और अनावश्यक कर्ज लिया जाता, तो प्रदेश पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता। उन्होंने कहा कि गंगा एक्सप्रेस-वे के दोनों ओर नौ इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक हब विकसित किए जा रहे हैं, जिसके लिए लगभग 7,000 एकड़ अतिरिक्त भूमि ली गई है। इससे औद्योगिक निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और मेरिट आधारित है। नवचयनित अभ्यर्थियों में किसी प्रकार की सिफारिश नहीं चली है। उन्होंने बताया कि अब तक प्रदेश में 9 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में एमएसएमई क्षेत्र के माध्यम से करीब 3 करोड़ लोगों को रोजगार मिला है। ड्रोन दीदी, लखपति दीदी और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना जैसी योजनाएं युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही हैं।
इस अवसर पर वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, अपर मुख्य सचिव वित्त दीपक कुमार, सचिव वित्त संदीप कौर और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष एसएन साबत सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।
जेपीएनआईसी को बताया कुप्रबंधन का उदाहरण
मुख्यमंत्री ने जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसकी प्रारंभिक लागत 200 करोड़ रुपये थी, जो बढ़कर 860 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, फिर भी परियोजना अधूरी है। उन्होंने इसे वित्तीय अनुशासनहीनता और कुप्रबंधन का उदाहरण बताया।
कुप्रबंधन के खिलाफ उठाए कड़े कदम
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में राजस्व बढ़ाने और लीकेज रोकने के लिए ठोस कदम उठाए गए। जहां पहले आबकारी से लगभग 12 हजार करोड़ रुपये की आय होती थी, वहीं अब यह बढ़कर 62-63 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर बनने के लिए वित्तीय अनुशासन और प्रभावी प्रबंधन आवश्यक है। ग्राम पंचायत से लेकर नगर निगम तक सभी इकाइयों को मजबूत वित्तीय ढांचे की आवश्यकता है, जिसमें आंतरिक ऑडिट की महत्वपूर्ण भूमिका है।
