Moradabad:अवैध स्विमिंग पूलों का जाल, सुरक्षा मानकों की अनदेखी
मुरादाबाद, अमृत विचार। बीते दिनों मेरठ के एक स्विमिंग पूल में हुई मौत की घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुरादाबाद में भी बड़ी संख्या में स्विमिंग पूल बिना अनुमति और सुरक्षा मानकों के संचालित हो रहे हैं। इन पूलों में न तो प्रशिक्षित लाइफ गार्ड की व्यवस्था है और न ही जरूरी सुरक्षा उपाय, जिससे कभी भी बड़े हादसा की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
स्विमिंग पूल का निर्माण मूलतः अच्छे तैराक तैयार करने और खेल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया जाता है। इसके लिए प्रशिक्षकों की उपलब्धता और उचित फिल्ट्रेशन प्लांट जरूरी होता है, लेकिन जिले में इन मानकों का पालन नहीं किया जा रहा। अधिकतर पूल केवल व्यावसायिक लाभ को ध्यान में रखकर बनाए और संचालित किए जा रहे हैं।
हालांकि पहले जहां जिले में किसी भी पूल संचालक द्वारा अनुमति न लेने की बात सामने आ रही थी, वहीं अब स्थिति में आंशिक बदलाव हुआ है। इसी वर्ष भोजपुर और लोधीपुर क्षेत्र में दो-दो स्विमिंग पूलों का विधिवत रजिस्ट्रेशन कराया गया है। विभाग के अनुसार स्विमिंग पूल के पंजीकरण के लिए 15 हजार रुपये वार्षिक शुल्क निर्धारित किया गया है। इसके बावजूद जिले के अधिकांश पूल अब भी बिना अनुमति संचालित हो रहे हैं।
करीब तीन वर्ष पहले कुंदरकी और बिलारी क्षेत्र के एक पूल में दो बच्चों की डूबने से मौत हो चुकी है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की गई। जिला क्रीड़ा अधिकारी सुनील कुमार सिंह के अनुसार स्विमिंग पूल के निर्माण के लिए क्रीड़ा विभाग प्रशासन के समन्वय से अनुमति देता है।
गाइडलाइन के अनुसार ओलंपिक स्तर के पूल की लंबाई 50 फीट और चौड़ाई 25 फीट होनी चाहिए, जबकि छोटे पूल के लिए 25 फीट लंबाई और 12.5 फीट चौड़ाई निर्धारित है। उन्होंने बताया कि जिले में अवैध रूप से संचालित पूलों का जल्द निरीक्षण कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
साल 2023 में मुरादाबाद में तैनात रहे क्रीड़ाधिकारी प्रेम कुमार ने अवैध पूल संचालन के विरुद्ध जिले में अभियान चलाया था। इसके तहत जयंतीपुर, बलदेवपुरी और करूला क्षेत्रों में बिना अनुमति संचालित स्विमिंग पूलों को सील कर कार्रवाई की थी। इसके बावजूद अवैध संचालन पर पूरी तरह रोक नहीं लग सकी है।
स्विमिंग पूल संचालन के लिए जरूरी मानक
- संबंधित एसडीएम, स्वास्थ्य विभाग और क्रीड़ा विभाग से अनुमति अनिवार्य
- प्रशिक्षित लाइफगार्ड की तैनाती जरूरी
- फिल्ट्रेशन प्लांट और साफ पानी की व्यवस्था
- चेंजिंग रूम, शौचालय और फर्स्ट एड सुविधा
- गहराई की स्पष्ट मार्किंग और चेतावनी बोर्ड
- बच्चों और वयस्कों के लिए अलग व्यवस्था
- सीसीटीवी कैमरे और सुरक्षा स्टाफ
- पानी की नियमित गुणवत्ता जांच
लाइसेंस लेने की प्रक्रिया
- भूमि उपयोग (लैंड यूज) की अनुमति
- निर्धारित आवेदन शुल्क (वार्षिक ₹15,000)
-संबंधित एसडीएम कार्यालय में आवेदन
- स्वास्थ्य विभाग से एनओसी
- क्रीड़ा विभाग से तकनीकी अनुमति
