खास बातचीत:आईटीसी भारत की ग्रीन पैकेजिंग की मांग को पूरा करने की तैयारी में 

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Published By Monis Khan
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अजय दयाल, हल्द्वानी। बीते साल मार्च महीने में आईटीसी लिमिटेड ने आदित्य बिरला रियल एस्टेट लिमिटेड के अंतर्गत आने वाली लालकुआं (उत्तराखंड) स्थित सेंचुरी पल्प एंड पेपर का अधिग्रहण किया। यह सौदा लगभग लगभग 3,500 करोड़ रु. किया गया है। हालांकि अधिग्रहण की औपचारिकताएं अगले माह तक पूरा होने की प्रक्रिया में है। आईटीसी की मौजूदा चारों पेपर इकाइयां दक्षिण भारत (तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना) और पश्चिम बंगाल में हैं। लालकुआं मिल के जरिए अब उत्तर भारत के बाजार में उनकी सीधी पहुंच और पकड़ मजबूत होगी। सेंचुरी पेपर लालकुआं के वाइस प्रेसिडेंट नरेश चन्द्रा लगभग 32 वर्षों से यहां अपनी सेवाएं देते आ रहे हैं। बीते साल ही वह पदोन्नति पाकर वाइस प्रेसिडेंट बने। पदोन्नति से पूर्व नरेश चन्द्रा बतौर वरिष्ठ महाप्रबन्धक, मिल की सामाजिक वानिकी, पर्यावरण, जल प्रबन्धन व सामाजिक दायित्व जैसे विभागों का कार्यभार संभाल रहे थे। सेंचुरी की रणनीति, मौजूदा स्थिति, चुनौतियों और भविष्य को लेकर उनसे ‘अमृत विचार’ की लंबी बातचीत हुई। पेश हैं इस बातचीत के कुछ अंश--  

सवाल: प्लास्टिक को पर्यावरण का सबसे बड़ा खतरा बताया जाता है। बावजूद इसके तमाम स्तरों, व्यवसायों में इसका प्रयोग हो रहा है। कागज इंडस्ट्री के पास क्या इसका विकल्प है?   

जवाब: फिलहाल हम भारत की ग्रीन पैकेजिंग की मांग को पूरा करने की तैयारी में हैं। जहां तक सिंगल यूज्ड प्लास्टिक के प्रयोग की बात है तो इसपर अंकुश लगाने की पहल हर नागरिक को करनी होगी। कुछ देशों में सख्त कानून व जुर्माना है, यह नौबत न आए इसके लिए हमें अपने आचरण को बदलना ही होगा।

सवाल: ऐसा नहीं लगता कि हमारे पास खासकर पॉलिथीन जैसा सस्ता का विकल्प नहीं है, इसलिए गैरकानूनी होने के बावजूद यह व्यवहारिक चलन में है?

जवाब: हां, कह सकते हैं कि अभी हमारे पास पॉलीथिन जैसा सस्ता पर्यावरण अनूकूल विकल्प नहीं है। लेकिन मोबाइल को हाथ में लेकर चलने की ही तरह हम झोला हाथ में लेकर चलने को आदत क्यों नहीं बना सकते।

सवाल: फिर ग्रीन पैकिजिंग से क्या आशय है?

जवाब: पर्यावरण नियमों और सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध के कारण कागज आधारित टिकाऊ पैकेजिंग की मांग बढ़ रही है। हम ई-कॉमर्स, फार्मा, और फूड डिलीवरी जैसे क्षेत्रों के लिए ईको-फ्रेंडली पैकेजिंग समाधानों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। यह हमारी आईटीसी नेक्स्ट रणनीति के तहत होगा।

सवाल: क्या इसके लिए कोई लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है?

जवाब: कंपनी का लक्ष्य 2028 तक अपनी 100 प्रतिशत पैकेजिंग को रिसाइकिल या कंपोस्टेबल बनाना है। साथ ही, पेपर और पेपरबोर्ड व्यवसाय से पीछे हटने का नहीं, बल्कि इसमें तेजी से विस्तार करने का इरादा है।

सवाल: एक ओर पेपर लेस क्ल्चर को बढ़ावा मिल रहा है वहीं दूसरी ओर पेपर इंडस्ट्री को बूस्ट करने की योजना है, कैसे संभव है?

जवाब: सेंचुरी पल्प एंड पेपर मुख्य रूप से राइटिंग-प्रिंटिंग पेपर, कॉपियर पेपर, टिशू पेपर और पैकेजिंग बोर्ड्स का निर्माण करता है। आने वाले समय हम भारत के पेपरबोर्ड और स्पेशियलिटी पेपर क्षेत्र में अपनी अग्रणी स्थिति को और अधिक मजबूत कर लेंगे।

सवाल: इस इंडस्ट्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

जवाब: स्वाभाविक है लकड़ी आधारित अन्य उद्योग हमारे सामने चुनौती हैं। उदाहरण के तौर पर कागज व रेडीमेड फर्नीचर दोनों ही उद्योगों में रॉ मैटेरियल यानि उपयोग किए जाने वाले पेड़ों (लकड़ियों) की मांग है। कागज उद्योग मुख्य रूप से जिन वृक्षों पर निर्भर है। फर्नीचर उद्योग द्वारा इन लकड़ियों की सीधी खरीद ने कागज मिलों के लिए कई संकट पैदा कर दिए हैं।

सवाल: बगास (गन्ने की खोई) का उपयोग तो आप बेहतर कर रहे हैं लेकिन क्या पराली का भी सदुपयोग है?

जवाब: हमने प्रयास किया लेकिन पराली से परिणाम नहीं मिल सके। इसमें कागज का निर्माण करने में सर्वाधिक उपयोगी गोंद की कमी रही।

सवाल: सेचुरी पेपर के बिजनेस का भविष्य क्या है?

जवाब : हमारा इरादा पेपर और पेपरबोर्ड व्यवसाय से पीछे हटने का नहीं, बल्कि इसमें तेजी से विस्तार करने का है। हम भारत के पेपरबोर्ड और स्पेशियलिटी पेपर क्षेत्र में अपनी अग्रणी स्थिति को और अधिक मजबूत कर लेंगे।

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