1.90 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों से 2.12 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंच रहीं पोषण सेवाएं, घट रहा एनीमिया... प्रसव 84 प्रतिशत के पार

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Published By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्र मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के 1.90 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से 2.12 करोड़ बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं को अनुपूरक पुष्टाहार और अन्य पोषण सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

अधिकारियों के अनुसार, गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की दर में पांच प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई है। वहीं संस्थागत प्रसव का प्रतिशत बढ़कर 84 से अधिक हो गया है, जिसे सुरक्षित मातृत्व की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषाहार वितरण को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए बायोमीट्रिक प्रणाली लागू की गई है। पोषण ट्रैकर के जरिए गर्भवती महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य की निगरानी की जा रही है। कुपोषण या पोषण स्थिति की सटीक पहचान के लिए सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को चार प्रकार के ग्रोथ मॉनीटरिंग डिवाइस और मोबाइल फोन उपलब्ध कराए गए हैं। इसके लिए एक लाख से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और एएनएम को प्रशिक्षित किया गया है।

विभाग के अनुसार, पोषण ट्रैकर के क्रियान्वयन में 98 प्रतिशत कार्यकुशलता हासिल की गई है। प्रदेश में 23 हजार से अधिक सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र आधुनिक सुविधाओं के साथ संचालित हैं। इसके अलावा 266 नए केंद्रों को स्वीकृति दी गई है।

60 लाख से अधिक महिलाओं का मिला लाभ

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत 60 लाख से अधिक महिलाओं को लाभ मिला है। जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसव कराने वाली महिलाओं को 1,400 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 1,000 रुपये की सहायता दी जाती है। प्रदेश में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों द्वारा 6.5 हजार आंगनबाड़ी केंद्र गोद लिए गए हैं। इससे इन केंद्रों की निगरानी, संसाधन और व्यवस्थाएं अधिक मजबूत हुई हैं। स्वस्थ मां ही स्वस्थ समाज और समृद्ध भविष्य की आधारशिला है। मातृ दिवस पर प्रदेश की आंगनवाड़ी व्यवस्था इसी संकल्प को नई मजबूती देती दिखाई दे रही है।

कुपोषण के खिलाफ “संभव अभियान” बना प्रभावी हथियार

कुपोषण के खिलाफ चलाए जा रहे ‘संभव अभियान’ के तहत 1.7 करोड़ बच्चों की स्क्रीनिंग की गई है। इनमें 2.5 लाख गंभीर कुपोषित बच्चों का पंजीकरण कर उन्हें विशेष पोषण सेवाओं से जोड़ा गया है। तीन से छह वर्ष आयु वर्ग के 35 लाख से अधिक बच्चों को प्रतिदिन हॉट कुक्ड मील उपलब्ध कराया जा रहा है। यह व्यवस्था 60 हजार महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संचालित की जा रही है।

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