देवीपाटन मंडल में ‘संध्या संवाद’ की शुरुआत, गांव पहुंचा प्रशासन
श्रावस्ती के टेंडवा महंथ में विशेष शिविर लगाकर मंडलायुक्त ने सुनी समस्याएं, मौके पर किया निस्तारण
लखनऊ, अमृत विचार: शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर समाधान करने के उद्देश्य से देवीपाटन मंडल में शुक्रवार को ‘संध्या संवाद’ कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इसकी शुरुआत श्रावस्ती जिले की ग्राम पंचायत टेंडवा महंथ से हुई, जहां मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने खुली चौपाल में ग्रामीणों से सीधा संवाद किया।
कार्यक्रम के तहत ग्राम पंचायत में एक दिवसीय विशेष शिविर आयोजित किया गया। विभिन्न विभागों ने स्टॉल लगाकर सरकारी योजनाओं की जानकारी दी और पात्र लाभार्थियों को मौके पर ही लाभ उपलब्ध कराया। मंडलायुक्त ने ग्रामीणों की शिकायतें सुनकर संबंधित अधिकारियों को त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए।
योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने की पहल
मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने कहा कि ‘संध्या संवाद’ का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचें। उन्होंने कहा कि प्रशासन के गांवों तक पहुंचने से योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी तथा लोगों का शासन-प्रशासन पर भरोसा मजबूत होगा।
जनसुनवाई में शिकायतों का निस्तारण
श्रावस्ती दौरे के दौरान मंडलायुक्त ने कलेक्ट्रेट सभागार में जनसुनवाई भी की। उन्होंने जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियों के साथ आमजन की शिकायतें सुनीं और कई मामलों के तत्काल समाधान के निर्देश दिए। अधिकारियों से कहा गया कि शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
बाढ़ तैयारियों की समीक्षा
संभावित बाढ़ को देखते हुए मंडलायुक्त ने राहत एवं बचाव कार्यों, संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी, राहत सामग्री की उपलब्धता और विभागीय समन्वय की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए सभी व्यवस्थाएं पहले से दुरुस्त रखी जाएं।
निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर जोर
मंडलायुक्त ने कर्मचारियों और पेंशनरों की समस्याएं भी सुनीं और लंबित जीपीएफ व पेंशन भुगतान को प्राथमिकता से निस्तारित करने के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने श्रावस्ती में चल रही निर्माण परियोजनाओं और पर्यटन विकास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यदायी संस्थाओं से कहा कि गुणवत्ता से समझौता किए बिना सभी परियोजनाएं तय समयसीमा में पूरी की जाएं।
