नमामि गंगे में यूपी बना ‘एंकर स्टेट’, सीपीसीबी रिपोर्ट में दर्ज हुआ जल गुणवत्ता में ऐतिहासिक सुधार

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Published By Anjali Singh
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16,201 करोड़ रुपये का निवेश सीवेज अवसंरचना में

लखनऊ, अमृत विचार: नमामि गंगे योजना के तहत यूपी देश का प्रमुख “एंकर स्टेट” बनकर उभरा है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा राज्य में सीवेज अवसंरचना के लिए 16,201 करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जो देशभर में इस मद में स्वीकृत कुल निवेश का लगभग 45 प्रतिशत है।

राज्य में स्वीकृत 80 परियोजनाओं में से 53 पूरी हो चुकी हैं। कुल 2,701 एमएलडी सीवेज उपचार क्षमता में से 1,520 एमएलडी क्षमता संचालित हो चुकी है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य गंगा में बिना उपचार के गिरने वाले सीवर प्रवाह को रोकना है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की 2025 रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2018 में कन्नौज से वाराणसी तक गंगा का पूरा हिस्सा गंभीर रूप से प्रदूषित था। अब सतत प्रदूषित पट्टी समाप्त हो चुकी है और प्रदूषण केवल फर्रुखाबाद-पुराना राजापुर, डालमऊ और मिर्जापुर-तारीघाट के सीमित हिस्सों तक रह गया है।
प्रमुख शहरों में तेजी से विकसित हो रही सीवेज व्यवस्था

वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर, आगरा, मथुरा, वृंदावन, मुरादाबाद, भदोही, बिजनौर और शुक्लागंज सहित 11 प्रमुख शहरों में सीवेज नेटवर्क और एसटीपी परियोजनाएं संचालित हैं। वाराणसी के अस्सी-बीएचयू में 55 एमएलडी और आगरा में 31 व 35 एमएलडी क्षमता के एसटीपी प्रभावी रूप से कार्य कर रहे हैं।

प्रयागराज का ‘ग्रीन एसटीपी मॉडल’ बना उदाहरण

प्रयागराज में विकसित ग्रीन एसटीपी मॉडल के तहत नैनी, झूंसी और फाफामऊ स्थित संयंत्र सौर ऊर्जा और बायोगैस से अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी कर रहे हैं। महाकुंभ 2025 के दौरान भी इन संयंत्रों ने निर्बाध संचालन बनाए रखा। वहीं, वाराणसी के अस्सी नाला क्षेत्र में एडवांस्ड ऑक्सिडेशन टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, अब लक्ष्य शेष प्रदूषित हिस्सों को भी साफ कर गंगा को शून्य प्रदूषण की दिशा में ले जाना है।

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