वाराणसी : खाने की नली में 20 दिनों तक फंसा रहा नकली दांत, बीएचयू के डॉक्टरों ने बचाई जान

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के डॉ. अनुराग तिवारी की ओपीडी में एक मरीज पहुंचा, जिसकी खाने की नली में पिछले 20 दिनों से नकली दांत फंसा हुआ था। नुकीले दांत ने नली की दीवारों को क्षतिग्रस्त कर दिया था और धीरे-धीरे घाव बन रहा था। डॉ. तिवारी ने बताया कि जटिल प्रक्रिया के बाद इंडोस्कोपी के जरिए नकली दांत को सफलतापूर्वक बाहर निकाला गया। दो घंटे बाद ही मरीज को खाना खाने की अनुमति दे दी गई। 

शनिवार को डॉ. तिवारी ने बताया कि गैस्ट्रोलॉजी के डॉक्टर होने के नाते अगर खाने की नली में कोई सामान्य खाद्य पदार्थ फंस जाए तो इंडोस्कोपी से आसानी से निकाला जा सकता है, लेकिन नुकीला दांत निकालना इतना सरल नहीं था। दांत न केवल नली को जख्मी कर रहा था, बल्कि खाना भी ऊपर की ओर फंस रहा था। इससे नली फटने का खतरा भी पैदा हो गया था। काफी मशक्कत के बाद 45 मिनट की प्रक्रिया में इंडोस्कोपी के जरिए दांत को बाहर निकाला गया।

 इस दौरान मरीज का 20 दिनों में 10 किलो वजन भी कम हो गया था। डॉ. तिवारी ने सलाह दिया कि नकली दांत लगवाना हो तो परमानेंट (स्थायी) लगवाएं। अगर हटाने वाले नकली दांत हैं तो पानी पीते समय मुंह ऊपर की ओर करके न पिएं। सबसे ज्यादा खतरा दांत के सरक जाने का होता है। खाना खाने के बाद नकली दांत निकालकर रख दें। खाते समय यह ध्यान रखें कि दांत हिल तो नहीं रहा है। समय-समय पर चिकित्सक की सलाह अवश्य लें। 

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