लखनऊ में अवैध रूप से रह रहा बांग्लादेशी गिरफ्तार, खोले थे बंगाली चांदसी क्लीनिक; सीतापुर में बनवाए जाली दस्तावेज

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Published By Anjali Singh
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अमृत विचारः थाना क्षेत्र स्थित छिपकर रह रहे बांग्लादेशी नागरिक अरुप बख्शी को पुलिस ने बुधवार को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ने फर्जी तरीके से मतदाता पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड, पैन कार्ड के साथ ही भारतीय पासपोर्ट भी बनवा लिया था। लाखों रुपये की संपत्ति बनाने के साथ ही आरोपी कुछ साल से बीकेटी के अस्ती रोड पर फर्जी डॉक्टर बनकर बंगाली चांदसी के नाम से क्लीनिक चला रहा था। क्लीनिक में सेक्स वर्धक दवाइयां, तेल बेचने के साथ ही हाइड्रोसील का ऑपरेशन तक करता था। पुलिस ने आरोपी के पास से बांग्लादेश के एक स्कूल की हाईस्कूल की मार्कशीट, एक आधार कार्ड, मोबाइल व रुपये बरामद किए हैं।

एसीपी बीकेटी विकास पांडेय ने बताया कि आरोपी अरुप बख्शी को विपश्यना ध्यान केंद्र फ्लाईओवर के नीचे किसान पथ से गिरफ्तार किया गया। आरोपी मूल रूप से देवभोग जिला नरैल बांग्लादेश का रहने वाला है। आरोपी वर्तमान में बीकेटी के मूसानगर अस्ति रोड पर किराए पर रह रहा था। मामले में 16 मई को उपनिरीक्षक योगेंद्र कुमार ने बीकेटी थाने में जाली दस्तावेज के आधार पर धोखाधड़ी व विदेशियों विषयक अधिनियम की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

पूछताछ में पता चला कि वह 2012 में भारत आया था। इसके बाद नेपाल चला गया। नेपाल से वह लखीमपुर के रास्ते सीतापुर पहुंचा। सीतापुर के महोली इलाके में उतरौली गांव में एक बंगाली के यहां करीब दो साल तक किराए पर रहा। वहीं पर रहकर उसने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आधार कार्ड, निवास प्रमाणपत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड, पैन कार्ड व अन्य दस्तावेज बनवाने के साथ बैंक खाता भी खुलवा लिया। इसके बाद वर्ष 2014-15 में मां दुर्गापुरम कालोनी अस्ती क्रासिंग के पास वकील के मकान में किराये पर रहता था।

इस दौरान आरोपी अरुप ने बंगाली चांदसी के नाम से क्लीनिक खोली और डॉक्टर बनकर लोगाें का इलाज करने लगा। वर्ष 2016 में भारतीय पासपोर्ट भी बनवा लिया। वर्ष 2019 में मामपुर बाना में 800 वर्गफीट का मकान भी खरीद लिया था। कुछ समय पहले आरोपी मां दुर्गापुरम कॉलोनी स्थित आवास छोड़कर मूसानगर में किराए पर रहने लगा था। इंस्पेक्टर बीकेटी संजय सिंह ने बताया कि जांच की जा रही है कि दस्तावेज बनवाने में किसने मदद की थी। पुलिस ने बुधवार को आरोपी को जेल भेज दिया है।

इलाज के बहाने बनाए थे ग्रामीणों से संबंध

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी क्लीनिक खोलकर लोगों को दवा देकर उपचार करता था। स्थानीय लोगों के बीच उसने खुद को भारतीय नागरिक और चिकित्सक के रूप में स्थापित कर लिया था। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि उसके पास कोई चिकित्सीय डिग्री या लाइसेंस था या नहीं।

फर्जी दस्तावेजों के नेटवर्क की तलाश

पुलिस आरोपी के फर्जी दस्तावेज तैयार कराने वाले नेटवर्क की भी जांच की जा रही है। आशंका है कि आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और पासपोर्ट बनवाने में कई लोगों की भूमिका हो सकती है। पुलिस संबंधित विभागों से दस्तावेजों का सत्यापन करा रही है और आरोपी के संपर्क में रहे लोगों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।

वैध रूप से आए माता-पिता से होगी पूछताछ

एसीपी ने बताया कि आरोपी अरुप के पिता खोकेन बख्शी और मां भी कई सालों से यहीं रह रही थी। बीकेटी पुलिस का कहना कि अरुप के माता-पिता वीजा पर वैध रूप से यहां रहने के लिए आए थे। उसके बाद अरुप वर्ष 2012 में अवैध रूप से भारत में दाखिल हुआ था। अरुप के माता-पिता उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर किसी रिश्तेदार के घर गए हैं। वहां से लौटने पर उनसे भी पूछताछ होगी।

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