तीन घंटे का प्रदर्शन, सरकार का मान मनौव्वल : राहुल-प्रियंका और अखिलेश की हिरासत से रिहाई तक… जानिये यह बड़ी बातें

Amrit Vichar Network
Edited By Virendra Pandey
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नई दिल्ली : कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पार्टी नेता प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित विभिन्न नेताओं को प्रधानमंत्री आवास के बाहर छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने के करीब तीन घंटे बाद मंगलवार रात को रिहा कर दिया गया। 

सोनिया राहुल

राहुल गांधी को छत्रसाल स्टेडियम से रिहा किया गया, जबकि प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कुछ अन्य नेताओं को पहले मंदिर मार्ग थाने ले जाया गया था। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी अपनी पुत्री प्रियंका तथा हिरासत में लिए गये अन्य नेताओं से मिलने मंदिर मार्ग थाने पहुंची थीं। बाद में सभी नेताओं को रिहा कर दिया गया। प्रियंका गांधी वाड्रा ने रिहाई के बाद कहा कि यदि लोकसभा में विपक्ष के नेता को संसद में बोलने की अनुमति नहीं दी जाती और शांतिपूर्ण प्रदर्शन की इजाजत नहीं मिलती, तो विपक्ष अपनी बात वहां रखेगा जहां संभव होगा। 

उन्होंने कहा कि देश के बच्चों और युवाओं की जायज मांगों को सुनना सरकार की जिम्मेदारी है और लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध सबका मौलिक अधिकार है। उन्होंने कहा, "हमारी मांग शुरू से स्पष्ट है। देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार होना चाहिए, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए, इस मुद्दे पर संसद में चर्चा होनी चाहिए और छात्रों की आवाज सुनी जानी चाहिए।" 

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने शिक्षा के बजाय बड़े उद्योगपतियों के कर्ज माफ करने पर अधिक ध्यान दिया है और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अपेक्षित प्रयास नहीं किये गये हैं। 

सरकार को छात्रों की मांगें स्वीकार करनी चाहिए : सपा प्रमुख

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार को छात्रों की मांगें स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बर्बर लाठीचार्ज किया गया, छात्र-छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार हुआ और लोकतंत्र में इस तरह की कार्रवाई अस्वीकार्य है। पूरा विपक्ष इस मुद्दे को संसद के भीतर भी मजबूती से उठायेगा। 

कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार ने लगातार दूसरे दिन भी दमनकारी रवैया अपनाया। विपक्ष ने छात्रों के मुद्दे पर चर्चा के लिए नियमों के तहत नोटिस दिया था, लेकिन सरकार चर्चा से बच रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का रवैया पूरी तरह अलोकतांत्रिक है। 

प्रधानमंत्री आवास के निकट कांग्रेस का धरना, 'बलपूर्वक' उठाए गए थे राहुल, प्रियंका और अन्य नेता 

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी  और कई अन्य कांग्रेस नेताओं ने छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के विरोध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस्तीफे की मांग करते हुए मंगलवार को उनके आवास के निकट धरना दिया, हालांकि पुलिस ने उन्हें 'बलपूर्वक' हटा दिया। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा राहुल गांधी से मिलकर बातचीत के बाद जब धरना समाप्त नहीं हुआ, तो पुलिस ने राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी, और कई अन्य नेताओं को 'बलपूर्वक' हिरासत में लिया और उन्हें बस में बैठाकर ले गई। 

राहुल गांधी को चोट आई

पुलिस द्वारा उठाए जाने के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने जोरदार प्रतिरोध भी किया। हिरासत में लिए जाने के बाद राहुल गांधी ने कहा कि सरकार चाहे कुछ भी कर ले, इंसाफ की लड़ाई नहीं रुकने वाली है। उन्होंने कहा, ''मोदी जी, हर ज़ोर आज़मा लो, सारी ताकत लगा लो - छात्रों के इंसाफ की ये लड़ाई अब रोके न रुकेगी।'' कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी को 'बलपूर्वक' और 'घसीटते हुए' उठाया गया, जिससे उन्हें नाक में चोट भी आई। हिरासत में लिए जाते समय प्रियंका गांधी ने 'नरेन्द्र मोदी कायर हैं' का नारा भी लगाया। हिरासत में लिए जाने के बाद राहुल गांधी को मॉडल टाउन इलाके में छत्रसाल स्टेडियम ले जाया, जबकि पुलिस प्रियंका गांधी को मंदिर मार्ग थाने ले गई। 

बाद में कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी भी मंदिर मार्ग थाने पहुंचीं और प्रियंका गांधी से मुलाकात की। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना दे रहे कांग्रेस और विपक्षी दलों के सांसदों को पुलिस ने ''घसीटकर'' हिरासत में लिया तथा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को भी बलपूर्वक वहां से ले जाया गया। खरगे ने कहा कि ''तानाशाह सरकार डर कर कांप रही है'' और सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर करोड़ों बच्चों का भविष्य बिगाड़ दिया। उन्होंने दावा किया कि 150 से अधिक पेपर लीक हुए और 25 बच्चों की जान चली गई और जब छात्र न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे तो उन पर लाठीचार्ज किया गया और डंडे बरसाए गए। कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि संसद के गेट बंद कर सांसदों को ''कैद'' किया गया, साझा विपक्ष की चर्चा की मांग नहीं मानी गई और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त नहीं किया गया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया, ''तानाशाही का दूसरा नाम अमितशाही है।'' समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप) की नेता सुप्रिया सुले भी इस धरना में शामिल हुए। संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित होने के बाद राहुल गांधी, खरगे, प्रियंका गांधी और कई अन्य सांसद अचानक से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस्तीफे की मांग करते हुए '7 लोक कल्याण मार्ग' के निकट पहुंच गए और वहीं धरने पर बैठ गए। धरने में शामिल नेताओं ने 'प्रधानमंत्री इस्तीफा दो', 'गुंडागर्दी नहीं चलेगी' तथा 'छात्रों को न्याय दो' जैसे नारे लगाए। धरना शुरू होने के कुछ देर बाद ही लोकसभा सदस्य चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा, शशिकांत सेंथिल और अन्य नेताओं को हिरासत में लिया गया।

राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी से धरना सामप्त करने का आग्रह किया

धरने के दौरान कांग्रेस नेताओं ने हाथों में 'हथकड़ियां' पहनकर छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का सांकेतिक विरोध किया। इससे पहले, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह और गृह सचिव गोविंद मोहन मौके पर पहुंचे तथा राहुल गांधी से धरना समाप्त करने का आग्रह किया। इस मुलाकात के बाद सिंह ने दावा किया कि राहुल गांधी को नीट के मुद्दे पर संसद में चर्चा के लिए आश्वासन दिया गया, लेकिन फिर उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी रख दी। उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का रवैया लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है। सिंह के मुताबिक, राहुल गांधी ने कहा कि यदि सरकार नीट और उससे जुड़े आंदोलन के सभी मुद्दों पर संसद में चर्चा के लिए तैयार हो जाती है, तो वह धरना समाप्त कर देंगे। उन्होंने दावा किया कि सरकार के शीर्ष नेतृत्व से अनुमति लेने के बाद राहुल गांधी को यह आश्वासन दिया गया कि सरकार संसद में नीट और उससे जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है। सिंह ने आरोप लगाया कि इसके बाद राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी रख दी और कहा कि अब उनकी दो मांगें हैं। जितेंद्र सिंह ने कहा कि जब राहुल गांधी को याद दिलाया गया कि उन्होंने पहले केवल संसद में चर्चा की मांग की थी, तो उन्होंने जवाब दिया कि अब उनकी मांगें बदल गई हैं। धरना शुरू होने के कुछ देर बाद राहुल गांधी ने छात्रों को न्याय दिलाने के इच्छुक लोगों से धरने में शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि छात्रों पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है और सरकार को इस मामले में जवाबदेही लेनी चाहिए। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि सरकार न तो घटना की जवाबदेही लेना चाहती है और न ही संसद में इस पर चर्चा की अनुमति दे रही है।

 

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