Machail Mata Yatra 2026: 3 दिन की देरी के बाद जानें कब शुरू होगी यात्रा? प्रशासन ने तय किए नए नियम, हर दिन सिर्फ इतने श्रद्धालुओं को मिलेगी अनुमति

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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खराब मौसम के चलते मचैल माता यात्रा तीन दिन के लिए टाली गई। अब 28 जुलाई से मौसम अनुकूल रहने पर यात्रा शुरू होगी। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, RFID ट्रैकिंग और सीमित संख्या में श्रद्धालुओं की एंट्री सहित कई नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

जम्मू। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में आयोजित होने वाली प्रसिद्ध मचैल माता यात्रा को खराब मौसम के कारण फिलहाल तीन दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया है। अब प्रशासन ने घोषणा की है कि यदि मौसम अनुकूल रहा तो 28 जुलाई से यात्रा शुरू की जाएगी। इस बार यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए कई नए नियम भी लागू किए गए हैं, जिनमें प्रतिदिन सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को ही दर्शन की अनुमति देना शामिल है।

रोज सिर्फ 8,000 श्रद्धालुओं को मिलेगी अनुमति

जिला प्रशासन के अनुसार, यात्रा के दौरान प्रतिदिन अधिकतम 8,000 श्रद्धालु ही मचैल माता मंदिर की ओर रवाना हो सकेंगे। श्रद्धालुओं को सुबह 5:00 बजे से शाम 5:00 बजे के बीच ही यात्रा करने की अनुमति होगी। यह व्यवस्था भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लागू की गई है।

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और RFID अनिवार्य

प्रशासन ने इस वर्ष यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण पूरी तरह अनिवार्य कर दिया है। श्रद्धालुओं की आवाजाही पर नजर रखने के लिए RFID (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) प्रणाली भी लागू की गई है। इसके तहत हर यात्री की यात्रा की निगरानी की जाएगी, जिससे आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

304.7 किलोमीटर की यात्रा, अंतिम 1.7 किलोमीटर पैदल

समुद्र तल से करीब 9,705 फीट की ऊंचाई पर स्थित मचैल माता मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को जम्मू से लगभग 304.7 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है। अधिकांश यात्रा सड़क मार्ग से पूरी होती है, जबकि मंदिर तक पहुंचने के लिए अंतिम 1.7 किलोमीटर का रास्ता पैदल चढ़ाई करके तय करना पड़ता है।

2025 की त्रासदी के बाद सुरक्षा पर विशेष जोर

मचैल यात्रा के प्रवेश द्वार चिसोटी गांव में 14 अगस्त 2025 को बादल फटने की घटना हुई थी, जिसमें 63 लोगों की मौत हुई थी। मृतकों में अधिकांश श्रद्धालु शामिल थे। कई लोग घायल हुए थे और करीब 30 लोग लापता हो गए थे। इसी घटना को देखते हुए इस वर्ष सुरक्षा व्यवस्था को पहले से अधिक मजबूत किया गया है।

25 जुलाई को खुलेंगे मंदिर के कपाट

प्रशासन के अनुसार, धार्मिक परंपराओं के तहत 25 जुलाई को मंदिर के पवित्र कपाट खोले जाएंगे। इस दौरान पुजारी और स्थानीय लोग पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करेंगे। इसके बाद मौसम की समीक्षा की जाएगी और परिस्थितियां अनुकूल रहने पर 28 जुलाई से श्रद्धालुओं के लिए यात्रा शुरू कर दी जाएगी।

यात्रियों के लिए बनाए गए कई पंजीकरण केंद्र

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सरकूट स्थित गौरी शंकर मंदिर आधार शिविर में दो RFID पंजीकरण केंद्र स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा गुलाबगढ़ में भी करीब छह पंजीकरण केंद्र बनाए गए हैं, जहां आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा सकेंगी।

सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय इंतजाम

यात्रा मार्ग पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, भारतीय सेना तथा विशेष पुलिस चौकियों की तैनाती की गई है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नरेश सिंह ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा से पहले जारी SOP को ध्यान से पढ़ें, निर्धारित समय का पालन करें और प्रशासन के निर्देशों का पूरी तरह अनुपालन करें।

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