₹71 लीटर का एथेनॉल: ,फिर भी पेट्रोल में क्यों मिलाया जा रहा? सरकार ने बताया पूरा गणित
सरकार का दावा- मकसद तेल कंपनियों का मुनाफा नहीं, ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता घटाना
पेट्रोल से महंगा होने के बावजूद सरकार एथेनॉल ब्लेंडिंग पर जोर क्यों दे रही है? जानिए एथेनॉल की कीमत, E20, किसानों को फायदा, ऊर्जा सुरक्षा और सरकार की पूरी रणनीति।
अमृत विचार, नई दिल्ली। पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा लगातार बढ़ाई जा रही है, लेकिन सवाल उठ रहा है कि जब एथेनॉल की खरीद कीमत ही करीब 71 रुपये प्रति लीटर है, तो सरकार इसे पेट्रोल में मिलाने पर इतना जोर क्यों दे रही है? लोकसभा में भी यही सवाल उठा। इसके जवाब में केंद्र सरकार ने कहा कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम का उद्देश्य तेल कंपनियों को सस्ता ईंधन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि देश को ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाना, किसानों को बेहतर बाजार देना और विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना है।
सवाल 1 : एथेनॉल आखिर कितने का खरीदा जा रहा है?
सरकार के अनुसार, मौजूदा एथेनॉल आपूर्ति वर्ष (नवंबर 2025 से अक्टूबर 2026) में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां एथेनॉल करीब 71 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीद रही हैं। इस कीमत में जीएसटी और परिवहन खर्च भी शामिल है।
इंडियन ऑयल : 71.18 रुपये प्रति लीटर
हिंदुस्तान पेट्रोलियम : 71.10 रुपये प्रति लीटर
भारत पेट्रोलियम : 71.21 रुपये प्रति लीटर
सरकार ने बताया कि गन्ने के रस, बी-हैवी और सी-हैवी शीरे, क्षतिग्रस्त खाद्यान्न, एफसीआई के अतिरिक्त चावल और मक्का जैसे विभिन्न स्रोतों से तैयार एथेनॉल की औसत एक्स-डिस्टिलरी कीमत 66.61 रुपये प्रति लीटर है, जिसमें जीएसटी और परिवहन लागत शामिल नहीं है।
सवाल 2 : जब एथेनॉल सस्ता नहीं है, तो इसे पेट्रोल में क्यों मिलाया जा रहा है?
सरकार का कहना है कि इस योजना को केवल खरीद कीमत के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। एथेनॉल मिश्रण का उद्देश्य दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों को साधना है। सरकार के मुताबिक इससे -कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटती है। अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर कम होता है। देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती है। किसानों को अपनी फसलों के लिए अतिरिक्त बाजार मिलता है। वाहनों से होने वाले प्रदूषण में कमी आती है। सरकार ने स्पष्ट किया कि एथेनॉल खरीद की व्यवस्था तेल कंपनियों का मुनाफा बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने और उत्पादकों को उचित मूल्य देने के लिए बनाई गई है।
सवाल 3 : पश्चिम एशिया संकट के दौरान क्या फायदा मिला?
सरकार ने संसद में कहा कि हाल के पश्चिम एशिया संकट के दौरान जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 70 से 80 प्रतिशत तक उछाल आया, तब भी भारत में पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी लगभग 7 से 8 प्रतिशत तक सीमित रही। सरकार का कहना है कि जब भारतीय कच्चे तेल की कीमत करीब 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, तब बाजार के हिसाब से पेट्रोल लगभग 125 रुपये प्रति लीटर बिक सकता था। इसके बावजूद दिल्ली में उपभोक्ताओं को 94.77 रुपये प्रति लीटर की दर से पेट्रोल उपलब्ध कराया गया। सरकार ने इसका एक कारण घरेलू स्तर पर उपलब्ध एथेनॉल को भी बताया। हालांकि इस अवधि में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को पेट्रोल पर औसतन लगभग 11 रुपये प्रति लीटर का अंडर-रिकवरी नुकसान हुआ, जिसकी कुल राशि करीब 21,300 करोड़ रुपये रही।
सवाल 4 : क्या E20 पेट्रोल से गाड़ी के इंजन को नुकसान होता है?
सरकार ने कहा कि अधिक एथेनॉल मिश्रण लागू करने से पहले ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), वाहन निर्माता कंपनियों, तेल विपणन कंपनियों और अन्य विशेषज्ञ संस्थाओं ने व्यापक परीक्षण किए थे। सरकार के अनुसार, देश में 23 करोड़ से अधिक वाहन उच्च एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग कर रहे हैं। इनमें 20 करोड़ से अधिक दोपहिया और लगभग 3 करोड़ पेट्रोल कारें शामिल हैं। अब तक एथेनॉल मिश्रण के कारण बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने का कोई प्रमाणित मामला सामने नहीं आया है। वाहन निर्माता कंपनियां E20 ईंधन का उपयोग करने वाले वाहनों की वारंटी भी जारी रखे हुए हैं।
सवाल 5 : किसानों को इससे क्या फायदा होगा?
सरकार का मानना है कि एथेनॉल की मांग बढ़ने से गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों के लिए नया बाजार तैयार होता है। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलने की संभावना रहती है।
सवाल 6 : सरकार का बड़ा लक्ष्य क्या है?
सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रण केवल ईंधन नीति नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण और विदेशी तेल पर निर्भरता कम करने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। इसलिए इस योजना का मूल्यांकन केवल इस आधार पर नहीं किया जाना चाहिए कि एथेनॉल पेट्रोल से सस्ता है या महंगा।
एक नजर में
-एथेनॉल खरीद कीमत: करीब 71 रुपये प्रति लीटर
-उद्देश्य: ऊर्जा सुरक्षा और आयातित तेल पर निर्भरता कम करना
-किसानों को लाभ: कृषि उत्पादों की मांग बढ़ने की संभावना
-पर्यावरण: वाहनों से उत्सर्जन कम करने में मदद का दावा
-वाहन: 23 करोड़ से अधिक वाहन उच्च एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग कर रहे हैं
-सरकार का संदेश: यह योजना मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर लागू की जा रही है।
