HIV News: एचआईवी से जंग में देरी पड़ रही भारी, छह में से चार मरीज गंभीर हालत में पहुंच रहे अस्पताल

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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लोहिया संस्थान के अध्ययन में खुलासा, गांवों में जागरूकता की कमी और सामाजिक झिझक से बढ़ रही समस्या, समय पर जांच पर जोर

पंकज द्विवेदी, लखनऊ, अमृत विचार : एचआईवी संक्रमण की समय पर पहचान और उपचार में देरी के कारण मरीजों में संक्रमण बढ़ रहा है। ये जानकारी डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (आरएमएलआईएमएस) के अध्ययन में सामने आई है। करीब 60 प्रतिशत एचआईवी संक्रमित तब अस्पताल पहुंचते हैं जब उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कमजोर हो चुकी होती है। देरी से अस्पताल पहुंचने की वजह जानकारी का अभाव, बीमारी को लेकर सामाजिक डर, कम शिक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच है। विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती चरण में ही पहचान होने पर एचआईवी को नियंत्रित किया जा सकता है।

आरएमएलआईएमएस के सूक्ष्म जीव विज्ञान और औषधि विभाग के डॉ. अमित कुमार, प्रो. अनुपम दास, प्रो. मनोदीप सेन और उनकी टीम ने ये अध्ययन किया। जनवरी 2021 से जुलाई 2022 के बीच संस्थान के एंटी रेट्रोवायरल उपचार केंद्र में पहुंचे 402 नए एचआईवी संक्रमित वयस्क मरीजों को अध्ययन में शामिल किया गया। यह शोध मार्च 2026 में जर्नल ऑफ द इंडियन मेडिकल एसोसिएशन में प्रकाशित हुआ। अध्ययन के अनुसार, 59.7 प्रतिशत मरीजों का सीडी 4 स्तर 350 कोशिकाएं प्रति घन मिलीमीटर से कम था। यह स्थिति एचआईवी की देर से पहचान और उपचार में देरी को दर्शाती है। वहीं, 35.1 प्रतिशत मरीजों में सीडी4 स्तर 200 कोशिकाएं प्रति घन मिलीमीटर से कम मिला, जिससे उन्हें गंभीर अवसरवादी संक्रमणों का खतरा अधिक था।

युवा मरीजों की संख्या ज्यादा

अध्ययन में एचआईवी संक्रमित मरीजों में युवाओं की संख्या अधिक रही। 18 से 29 वर्ष आयु वर्ग के मरीजों की संख्या 40.8 प्रतिशत रही। कुल मरीजों में 73.4 प्रतिशत पुरुष थे, जबकि 61.2 प्रतिशत मरीज विवाहित थे। संक्रमण का सबसे बड़ा कारण विषमलैंगिक संपर्क पाया गया। इससे जुड़े 47 प्रतिशत मामले सामने आए। इसके बाद इंजेक्शन से नशीली दवाओं के सेवन के कारण 17.9 प्रतिशत संक्रमण मिले। करीब 22.1 प्रतिशत मामलों में संक्रमण का कारण पता नहीं चल सका।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति ज्यादा चिंताजनक

अध्ययन में शामिल 58 प्रतिशत मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से थे। इनमें से 61.4 प्रतिशत मरीज तब उपचार के लिए पहुंचे, जब उनका सीडी4 स्तर 350 से नीचे जा चुका था।शोधकर्ताओं ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में एचआईवी को लेकर गलत धारणाएं, सामाजिक भेदभाव का डर और जांच कराने में झिझक मरीजों को समय पर स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचने से रोकती है।

कम शिक्षा से बढ़ रही देरी

अध्ययन में मरीजों के शैक्षिक स्तर का भी असर दिखाई दिया। करीब एक तिहाई मरीजों ने प्राथमिक स्तर तक ही शिक्षा प्राप्त की थी, जबकि 21.9 प्रतिशत मरीज निरक्षर थे। कम जानकारी के कारण कई लोग संक्रमण के लक्षणों और समय पर जांच के महत्व को नहीं समझ पाते। कृषि कार्य से जुड़े लोगों और सेवा क्षेत्र में काम करने वालों में भी देर से उपचार केंद्र पहुंचने के मामले अधिक पाए गए।

जांच बढ़ाने और जागरूकता पर जोर

शोधकर्ताओं ने नियमित एचआईवी जांच को बढ़ावा देने, जागरूकता अभियान मजबूत करने और मरीजों को समय पर उपचार केंद्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था बेहतर करने की सलाह दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, एचआईवी संक्रमण का समय पर पता चलने और नियमित एंटी रेट्रोवायरल उपचार मिलने से मरीज स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि लोग बिना डर और झिझक के जांच कराएं और संक्रमण की पुष्टि होने पर तुरंत उपचार शुरू करें।

पेशे के अनुसार मरीजों का विवरण
पेशा कुल मरीज देर से पहुंचे मरीज
बेरोजगार 93 (23.1%) 47 (50.5%)
नौकरी 86 (21.4%) 63(73.3%)
व्यवसाय 72 (17.9%) 47(65.3%)
मजदूर 68 (16.9%) 37(54.4%)
छात्र 43 (10.7%) 20(46.5%)
ट्रक चालक 22 (5.5%) 11(50.0%)
कृषि कार्य 18 (4.5%) 15(83.3%)

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