लखनऊ में रिटायर्ड एयरपोर्ट डायरेक्टर की पत्नी से 70 लाख की ठगी, महाराष्ट्र ATS और NIA अधिकारी बताकर बनाया डिजिटल अरेस्ट
फर्जी आईपीएस, एटीएस और एनआईए अधिकारी बनकर 70 वर्षीय महिला को 7 दिन तक बनाया शिकार
लखनऊ में साइबर ठगों ने फर्जी आईपीएस, एटीएस और एनआईए अधिकारी बनकर रिटायर्ड एयरपोर्ट डायरेक्टर की 70 वर्षीय पत्नी को 7 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा और 70 लाख रुपये ठग लिए। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
लखनऊ। साइबर ठगों ने राजधानी लखनऊ में डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर रिटायर्ड एयरपोर्ट डायरेक्टर की 70 वर्षीय पत्नी से 70 लाख रुपये की ठगी कर ली। जालसाजों ने खुद को पुलिस मुख्यालय, एटीएस और एनआईए का अधिकारी बताकर महिला को सात दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा और अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करा ली। पीड़िता माधुरी भगत, जानकीपुरम स्थित दीपक डिलक्स सहारा ग्रेस अपार्टमेंट की रहने वाली हैं। उनके पति भोलानाथ प्रसाद भगत एयरपोर्ट डायरेक्टर पद से रिटायर हुए हैं।
आतंकी गतिविधियों से जोड़कर बनाया दबाव
माधुरी भगत के मुताबिक, 16 जुलाई को उनके मोबाइल पर एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को लखनऊ पुलिस मुख्यालय का सीनियर इंस्पेक्टर आकाश शर्मा बताया और दावा किया कि उनके पति के नाम से जम्मू-कश्मीर से जारी एक अवैध सिम का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों में हुआ है। इसके बाद अन्य आरोपियों ने खुद को महाराष्ट्र एटीएस और एनआईए अधिकारी बताकर वीडियो कॉल और फोन के जरिए कार्रवाई का डर दिखाया। ठगों ने दंपती को भरोसा दिलाया कि जांच में सहयोग करने पर उन्हें ऑनलाइन "नॉन इनवॉल्वमेंट सर्टिफिकेट" जारी कर दिया जाएगा। आरोपियों ने मामले को पूरी तरह गोपनीय रखने और हर दो घंटे में मोबाइल से सीक्रेसी रिपोर्ट भेजने का दबाव बनाया। परिवार को खतरे का डर दिखाकर महिला पर लगातार मानसिक दबाव बनाया गया।
एफडी तुड़वाकर चार खातों में ट्रांसफर कराए 70 लाख
पीड़िता के अनुसार, साइबर ठगों ने 16 से 19 जुलाई के बीच उनकी बैंक एफडी और अन्य वित्तीय जानकारी हासिल कर ली। इसके बाद 20 से 22 जुलाई के बीच अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई। ठगों ने चार बैंक खातों में क्रमशः 30 लाख, 11 लाख, 19 लाख और 10 लाख रुपये यानी कुल 70 लाख रुपये जमा कराए।
साइबर क्राइम थाने में दर्ज हुआ मुकदमा
सात दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रहने के बाद 23 जुलाई को महिला ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और ट्रांजैक्शन की जांच शुरू कर दी है। साइबर पुलिस ठगी की गई रकम को ट्रेस कर वापस कराने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर अपनी बैंकिंग जानकारी साझा न करें और पुलिस अधिकारी बनकर डराने वालों से सतर्क रहें।
