Gorakhpur News: MMMUT के 11वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने बांटी डिग्रियां, बोलीं- ज्ञान का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करें

Amrit Vichar Network
Edited By Deepak Mishra
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1474 डिग्रियां डिजिलॉकर पर अपलोड, 20 मेधावियों को 46 स्वर्ण पदक; महिला सशक्तिकरण और नवाचार पर दिया जोर

गोरखपुर में एमएमएमयूटी के 11वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 1474 डिग्रियां डिजिलॉकर पर उपलब्ध कराईं, 20 मेधावियों को 46 पदक दिए और विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल व कुलाधिपति आनंदी बेन पटेल ने बुधवार को गोरखपुर में मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता की और विभिन्न शोधार्थियों को उपाधि एवं छात्र छात्राओं को स्वर्ण पदक प्रदान किये। 

इस अवसर पर महामहिम ने विश्वविद्यालय के आधुनिक सुविधा से युक्त आर्यभट्ट हाल का लोकार्पण तथा सभी डिग्री एवं अंक पत्र को डिजीलॉकर पर अपलोड किया, वार्षिक पत्रिका मालविका, हिंदी पत्रिका प्रवाह, चित्र पत्रिका कार्विंग्स और गोद लिए गए गांव की गतिविधियों पर आधारित रिपोर्ट ग्रामोत्थान का लोकार्पण तथा देवरिया के पांच आंगनबाड़ी केंद्रों को आंगनबाड़ी किट वितरित किया तथा मेरी मां पर आधारित प्रतियोगिता के विजेता स्कूली बच्चों को सम्मानित किया तथा प्रदर्शनी का अवलोकन किया। 

विद्यार्थियों को दी सफलता की बधाई

इस अवसर पर राज्यपाल ने स्नातक, स्नातकोत्तर एवं शोध उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामना देते हुए कहा कि आपकी इस सफलता में आपके माता-पिता, गुरुजनों तथा विश्वविद्यालय परिवार का भी महत्वपूर्ण योगदान है। मैं उन्हें भी हार्दिक बधाई देती हूँ। राज्यपाल ने कहा कि महामना पंडित मदन मोहन मालवीय का भारतीय शिक्षा, राष्ट्र निर्माण और राष्ट्रीय चेतना के विकास में अतुलनीय योगदान रहा है। 

उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना कर ऐसी शिक्षा व्यवस्था की परिकल्पना की, जो ज्ञान के साथ-साथ संस्कार, चरित्र निर्माण और राष्ट्रसेवा की भावना का विकास करे जो आज भी भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को मालवीय जी के आदर्शों से प्रेरणा लेकर अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज एवं राष्ट्र के उत्थान के लिए करना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि आज जब मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उनके नाम और आदर्शों को धारण किए हुए है, तब यहाँ से उपाधि प्राप्त करने वाले प्रत्येक विद्यार्थी का यह नैतिक दायित्व है कि वह अपने ज्ञान, नवाचार और तकनीकी कौशल का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रखे, बल्कि समाज, राष्ट्र और मानवता के कल्याण के लिए समर्पित भाव से कार्य करे। 

1474 डिग्रियां डिजिलॉकर पर, 60% पदक छात्राओं को

उन्होंने कहा कि आज कुल 1474 उपाधियाँ डिजिलॉकर पर उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें 393 छात्राएँ तथा 281 छात्र सम्मिलित हैं। उन्होंने कहा कि यह भी हर्ष का विषय है कि उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 20 विद्यार्थियों को कुल 46 पदकों से सम्मानित किया गया है। उन्होंने कहा कि पदक प्राप्त करने वालों में 60 प्रतिशत छात्राएँ तथा 40 प्रतिशत छात्र हैं। यह उच्च शिक्षा में महिला सशक्तिकरण की प्रेरक तस्वीर प्रस्तुत करती है। 

राज्यपाल ने कहा कि दीक्षंत समारोह में उपस्थित मुख्य अतिथि हंदुस्तान पैट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक विकास कौशल ने अपने उद्बोधन में कहा कि हमने समाज को क्या दिया, हमारी समाज के प्रति क्या जिम्मेदारी है। दीक्षांत समारोह केवल डिग्री लेना नही है, बल्कि संवेदना, जागृत, राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा का समारोह होता है। 

मुख्य अतिथि ऊर्जा क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित वैश्विक नेतृत्वकर्ता हैं, जिन्हें तीन दशकों से अधिक का समृद्ध अनुभव प्राप्त है। पेशेवर उत्कृष्टता के साथ -साथ युवा प्रतिभाओं के मार्गदर्शन और उन्हें भविष्य के नेतृत्व के लिए तैयार करने के प्रति आपका समर्पण प्रेरणादायक है। 

कुलाधिपति ने कहा कि आगरा के दीक्षांत समारोह में पर्यावरण संरक्षण पर एक नन्ही बालिका आव्या की प्रस्तुति ने मुझे अत्यंत प्रभावित किया। अपनी सहज, निष्कपट और भावपूर्ण अभिव्यक्ति से उसने यह संदेश दिया कि यदि बचपन में प्रकृति के प्रति संवेदना का बीजारोपण कर दिया जाए, तो आने वाली पीढ़ियाँ धरती की सबसे बड़ी संरक्षक बन सकती हैं। सच तो यह है कि बड़े-बड़े भाषणों से अधिक प्रभाव कभी-कभी बच्चों की सरल प्रस्तुति छोड़ जाती है। 

बच्चों की प्रतिभा निखारने पर दिया जोर

उन्होंने कहा कि सभी विश्वविद्यालय अपने द्वारा गोद लिए गए गाँवों के विद्यालयों में विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन करता है तथा उनके विजेता विद्यार्थियों को दीक्षांत समारोह जैसे गरिमामय मंच पर सम्मानित करता है। ये बच्चे जब मंच पर आकर भाषण देते हैं, कहानियाँ सुनाते हैं, नाट्य प्रस्तुतियाँ करते हैं और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं, तब उनके भीतर आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति की क्षमता, नेतृत्व कौशल और सृजनात्मक सोच का विकास होता है। यही अवसर है कि उनके जीवन की दिशा बदली जा सकती है। आज जिन बच्चों को हम मंच प्रदान कर रहे हैं, वही कल विकसित भारत के वैज्ञानिक, शिक्षक, प्रशासक, उद्यमी, कलाकार और जननेता बनेंगे इसलिए हमारा दायित्व केवल उन्हें पुरस्कार देना नहीं, बल्कि उनकी प्रतिभा को निरंतर निखारना भी है। उन्हें उत्कृष्ट मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, आधुनिक अवसर और निरंतर प्रोत्साहन उपलब्ध कराना विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

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