Barabanki Nag Devta Temple: बाराबंकी के नाग देवता मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, दूध-चावल चढ़ाने के लिए लगी श्रद्धालुओं की लंबी कतारें

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Edited By Ankit Yadav
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दूर-दराज के जिलों से पहुंचे श्रद्धालु, सुबह से लगी रही श्रद्धालुओं की कतार

बाराबंकी, अमृत विचार। श्रावण मास की आहट और नाग पंचमी के करीब आते ही जिले के प्रसिद्ध मंजीठा स्थित नाग देवता मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी है। बुधवार को सुबह से ही मंदिर परिसर और बांबी के आसपास श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। तेज धूप के बावजूद लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान नाग देवता के दर्शन कर दूध और चावल अर्पित किए तथा परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की लंबी आयु और सर्प भय से मुक्ति की कामना की।

आषाढ़ माह की गुरु पूर्णिमा से शुरू होकर नाग पंचमी तक चलने वाला मंजीठा मेला हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। इस बार भी जिले के अलावा आसपास के कई जनपदों से बड़ी संख्या में लोग मेले में पहुंचे, जिससे पूरे दिन मंदिर परिसर में धार्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा।

Devotees Gather at Manjitha Nag Devta Temple Before Nag Panchami
श्रावण मास और नाग पंचमी से पहले बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे।

 

सुबह से लगी रही श्रद्धालुओं की कतार

बुधवार तड़के से ही मंदिर के मुख्य द्वार पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, दर्शन और पूजन के लिए आने वाले लोगों की संख्या बढ़ती गई। मंदिर परिसर में महिलाओं, पुरुषों और बच्चों की अलग-अलग कतारें नजर आईं। कई श्रद्धालु अपने साथ दूध, चावल और मिट्टी की मालिया लेकर पहुंचे थे, जिन्हें बांबी पर चढ़ाकर उन्होंने नाग देवता का पूजन किया।

भीड़ अधिक होने के कारण कुछ समय के लिए बैरिकेडिंग पर दबाव बढ़ गया और एक हिस्सा टूट गया। हालांकि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने तत्काल दूसरी बल्ली लगाकर व्यवस्था संभाल ली और श्रद्धालुओं को दोबारा कतारबद्ध कराया। इसके बाद दर्शन और पूजन की व्यवस्था सुचारु रूप से चलती रही।

दूर-दराज के जिलों से पहुंचे श्रद्धालु

मंजीठा नाग देवता मंदिर की मान्यता केवल बाराबंकी तक सीमित नहीं है। बुधवार को सीतापुर, उन्नाव, गोंडा, लखनऊ, रायबरेली, अयोध्या और सुल्तानपुर सहित कई जिलों से श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। कई परिवार सुबह ही अपने निजी वाहनों और सार्वजनिक परिवहन से यहां पहुंच गए थे। श्रद्धालुओं का कहना था कि वर्षों से उनकी आस्था इस मंदिर से जुड़ी हुई है और हर वर्ष नाग पंचमी से पहले यहां दर्शन करने की परंपरा निभाते हैं। मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद लोगों ने परिवार की खुशहाली, बेहतर स्वास्थ्य और जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना की।

Devotees Gather at Manjitha Nag Devta Temple Before Nag Panchami
भक्तों ने नाग देवता को दूध और चावल अर्पित कर पूजा-अर्चना की।

 

क्या है दूध-चावल चढ़ाने की धार्मिक मान्यता?

मंजीठा स्थित नाग देवता मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थित पवित्र बांबी है। स्थानीय मान्यता के अनुसार श्रद्धालु मिट्टी की मालिया में दूध और चावल भरकर बांबी पर अर्पित करते हैं। पूजा पूरी होने के बाद खाली मालिया को प्रसाद के रूप में अपने घर ले जाते हैं।

मान्यता है कि ऐसा करने से घर-परिवार पर नाग देवता की कृपा बनी रहती है और सर्प भय से रक्षा होती है। इसी विश्वास के चलते हर वर्ष हजारों श्रद्धालु इस अनूठी परंपरा का पालन करने के लिए यहां पहुंचते हैं। नाग पंचमी के करीब आते-आते श्रद्धालुओं की संख्या और अधिक बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

मेले में खरीदारी के लिए भी उमड़ी भीड़

धार्मिक आस्था के साथ-साथ मंजीठा मेला स्थानीय व्यापारियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। मंदिर परिसर और आसपास लगे अस्थायी बाजारों में दिनभर चहल-पहल बनी रही। लकड़ी से बने घरेलू सामान, खिलौने, कॉस्मेटिक, पूजा सामग्री, मिठाई और खानपान की दुकानों पर लोगों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिली। बच्चों ने खिलौनों और झूलों का आनंद लिया, जबकि महिलाओं ने घरेलू उपयोग की वस्तुओं और श्रृंगार सामग्री की खरीदारी की। दुकानदारों ने बताया कि मेले की शुरुआत से ही कारोबार अच्छा चल रहा है और नाग पंचमी तक ग्राहकों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।

सुरक्षा और व्यवस्था पर प्रशासन की नजर

श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर परिसर में पुलिस बल तैनात रहा। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई और समय-समय पर श्रद्धालुओं से कतार में रहकर दर्शन करने की अपील की जाती रही। प्रशासन का प्रयास रहा कि दर्शन व्यवस्था सुचारु बनी रहे और किसी श्रद्धालु को असुविधा का सामना न करना पड़े। मंजीठा नाग देवता मंदिर का यह मेला धार्मिक आस्था, लोक परंपरा और सामाजिक मेल-मिलाप का अनूठा संगम माना जाता है। हर वर्ष की तरह इस बार भी श्रद्धालुओं का उत्साह यह बताता है कि आधुनिक समय में भी पारंपरिक धार्मिक मेलों के प्रति लोगों की आस्था पहले की तरह ही मजबूत बनी हुई है।

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