Outsourcing News : आउटसोर्सिंग मामलों पर हाईकोर्ट ने लगाई सरकार को फटकार, शपथपत्र नहीं दिया तो लगेगा जुर्माना
सरकार के ढीले रवैये पर नाराज हाई कोर्ट; 13 अगस्त तक मांगा पूरा ब्योरा, सुप्रीम कोर्ट भी दे चुका है समयसीमा
हाई कोर्ट ने आउटसोर्सिंग मामलों में सरकार के ढीले रवैये पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने 13 अगस्त तक पूरा शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया, अन्यथा ₹50 हजार का जुर्माना लगाया जाएगा।
डिजिटल डेस्क अमृत विचार। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग सेवाओं से जुड़े मामलों में राज्य की सुक्खू सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि सरकार इस मामले में निजी वादी की तरह व्यवहार कर रही है और केवल समय टालने का प्रयास कर रही है। कोर्ट ने अंतिम अवसर देते हुए आगामी सुनवाई तक सभी जरूरी जानकारियों के साथ शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। ऐसा नहीं करने पर सरकार पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, जो आईजीएमसी शिमला के पुअर पेशेंट्स फंड में जमा कराया जाएगा।
छह याचिकाओं से जुड़ा है मामला
मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी नेगी की खंडपीठ आउटसोर्सिंग से संबंधित करीब छह याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। इन याचिकाओं में पिछले तीन वर्षों के दौरान विभिन्न सरकारी विभागों में हुई आउटसोर्सिंग का पूरा ब्योरा मांगा गया है।
सरकार की रिपोर्ट में मिलीं गंभीर विसंगतियां
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से विभागवार डाटा सूची पेश की गई, लेकिन हाई कोर्ट ने उसमें कई गंभीर विसंगतियां और विरोधाभास पाए। अदालत ने देखा कि कई विभागों में स्वीकृत और रिक्त पदों की संख्या शून्य दर्शाई गई है, जो रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर भी उठे सवाल
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि केवल स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में ही 24,188 स्वीकृत पद हैं। जबकि सरकार की ओर से पेश नई सूची में राज्य के सभी 46 विभागों में कुल 30,805 स्वीकृत पद ही दर्शाए गए हैं। अदालत ने इस आंकड़े पर भी सवाल उठाते हुए इसे वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाने वाला बताया।
सुप्रीम कोर्ट ने भी तय की थी समयसीमा
इससे पहले हाई कोर्ट के 18 मई और 16 जून 2026 के अंतरिम आदेशों को चुनौती देते हुए राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। 27 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि राज्य सरकार पांच कार्य दिवस के भीतर हाई कोर्ट में पूरा शपथपत्र दाखिल करे। साथ ही स्वास्थ्य विभाग की 6 नवंबर 2025 की अधिसूचना के तहत चयन और नियुक्ति प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति दी थी, लेकिन यह स्पष्ट किया था कि सभी नियुक्तियां हाई कोर्ट के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी।
13 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
हाई कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट समयसीमा के बावजूद राज्य सरकार निर्धारित अवधि में पूरा विवरण प्रस्तुत करने में विफल रही है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त को तय करते हुए सरकार को तब तक विस्तृत शपथपत्र दाखिल करने का अंतिम मौका दिया है।
