Hockey Jersey Controversy: जर्सी के रंग पर विवाद को श्रीजेश ने किया खारिज, बोले- ‘50 साल का इंतजार खत्म करने का सुनहरा मौका’
भारतीय हॉकी टीम की केसरिया जर्सी पर उठे सवालों के बीच पूर्व गोलकीपर और मौजूदा कोच पीआर श्रीजेश ने कहा- राजनीति को खेल से दूर रखें, खिलाड़ियों का पूरा ध्यान वर्ल्ड कप में पदक पर होना चाहिए
नई दिल्लीः भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का कलर को लेकर विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। नीले से केसरिया किए जाने को लेकर चल रहे विवाद के बीच गोलकीपर और मौजूदा कोच पीआर श्रीजेश ने इसे ज्यादा तवज्जो न देने की सलाह दी है। श्रीजेश ने कहा कि टीम को मैदान के बाहर चल रही चर्चाओं से दूर रहने और अपना पूरा ध्यान 50 साल बाद विश्व कप में पदक जीतने पर लगाने को कहा है।
आपको बता दें कि नीदरलैंड और बेल्जियम में 15 अगस्त से शुरू होने वाले हॉकी विश्व कप से पहले भारतीय हॉकी टीमों की जर्सी का रंग बदला गया है। पहले जहां टीम नीली जर्सी में नजर आती थी, वहीं इस बार जर्सी का कलर केसरिया किया गया है। जर्सी के रंग को लेकर पूर्व कप्तानों और खिलाड़ियों की ओर से सवाल उठाए गए हैं।
‘2014 और 2018 में भी बदला था जर्सी का रंग’
जर्सी विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए श्रीजेश ने कहा कि उन्हें शुरुआत में यह समझ ही नहीं आया कि आखिर विवाद किस बात को लेकर है। उनका कहना है कि 2014 और 2018 के विश्व कप में भी भारतीय टीम की जर्सी का रंग बदला गया था।
श्रीजेश के मुताबिक, 2014 में टीम ने पीली और 2018 में हल्के नीले रंग की जर्सी पहनी थी। इसके अलावा भारतीय टीम की ट्रेनिंग किट में भी ऑरेंज रंग का इस्तेमाल होता रहा है। ऐसे में इस बार जर्सी का रंग बदलने पर इतनी चर्चा क्यों हो रही है, यह उनकी समझ से बाहर है।
उन्होंने कहा कि अगर विवाद सिर्फ रंग बदलने को लेकर है तो पहले भी ऐसा होना चाहिए था।
‘नीली टर्फ पर खेलने में दिक्कत की वजह समझ नहीं आती’
श्रीजेश ने जर्सी का रंग बदलने पर आपत्ति नहीं जताई, लेकिन नीली टर्फ पर केसरिया जर्सी को बेहतर बताने की दलील पर सवाल जरूर उठाया।
उनका कहना है कि भारतीय टीम वर्षों से नीली जर्सी पहनकर नीली टर्फ पर खेलती रही है। ऐसे में सिर्फ मैदान के रंग के कारण जर्सी बदलने की वजह उन्हें समझ नहीं आती।
उन्होंने कहा कि अगर जर्सी का रंग बदलने का कारण खेलने में परेशानी है तो फिर भविष्य में टीम को दोबारा नीली जर्सी नहीं पहननी चाहिए।
‘खिलाड़ियों की सहमति है तो विवाद खत्म होना चाहिए’
भारत के लिए 339 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले श्रीजेश ने कहा कि मीडिया में सामने आई जानकारी के अनुसार जर्सी का रंग बदलने का फैसला खिलाड़ियों की सहमति से हुआ है।
उन्होंने कहा कि हॉकी इंडिया ने केसरिया जर्सी को लेकर एफआईएच से जरूरी अनुमति ली होगी। अगर ऑरेंज रंग की जर्सी से नीदरलैंड की टीम के साथ रंग समान होने की स्थिति बनती है, तो भारत अपनी दूसरी सफेद जर्सी पहन सकता है।
श्रीजेश ने साफ कहा कि अगर खिलाड़ियों की मंजूरी से जर्सी का रंग बदला गया है तो विवाद की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए, क्योंकि आखिर मैदान पर खिलाड़ियों को ही उतरकर खेलना है।
‘राजनीति को खेल से दूर रखना चाहिए’
जर्सी विवाद के राजनीतिक रंग लेने पर श्रीजेश ने कहा कि खेल को राजनीति से दूर रखना चाहिए। उनके मुताबिक खिलाड़ी सबसे महत्वपूर्ण हैं और यदि उन्हें जर्सी के रंग से कोई परेशानी नहीं है तो बाहर बैठे लोगों को इस मुद्दे पर ज्यादा चिंता नहीं करनी चाहिए।
हालांकि उन्होंने एक बात पर जरूर जोर दिया कि यदि जर्सी बदलनी थी तो फैसला कुछ पहले किया जाना बेहतर होता, ताकि खिलाड़ियों को नई जर्सी के साथ खेलने की आदत हो जाती।
‘खिलाड़ियों को नई जर्सी में खेलने का मौका मिलना चाहिए था’
श्रीजेश ने कहा कि खिलाड़ियों को नई जर्सी पहनकर कुछ मैच खेलने का मौका मिलना चाहिए था। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि खिलाड़ी मैदान पर आमतौर पर सामने वाले खिलाड़ी को उसकी जर्सी के रंग से पहचानने के आदी होते हैं।
ऐसे में अचानक रंग बदलने पर खिलाड़ियों को अभ्यस्त होने में थोड़ा समय लग सकता है। उनके मुताबिक अगर बदलाव करना था तो इसे कुछ समय पहले किया जाना चाहिए था।
बाहर की आवाजों का टीम पर असर नहीं पड़ेगा: श्रीजेश
विश्व कप से पहले जर्सी विवाद को लेकर श्रीजेश को भरोसा है कि मैदान के बाहर चल रही चर्चाओं का भारतीय टीम के प्रदर्शन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि टीम के भीतर हमेशा खिलाड़ियों को बाहर की आवाजों से दूर रहने की बात कही जाती रही है। टीम को मैदान के बाहर की गतिविधियों की जानकारी रहती है, लेकिन अब खिलाड़ियों के पास टूर्नामेंट पर ध्यान केंद्रित करने का समय है।
श्रीजेश के मुताबिक भारतीय टीम फिलहाल यूरोप में है और उसे जर्सी विवाद जैसी बातों को पीछे छोड़कर विश्व कप पर ध्यान देना चाहिए।
‘50 साल का इंतजार खत्म करने का सबसे सुनहरा मौका’
श्रीजेश ने भारतीय हॉकी टीम को सबसे अहम संदेश देते हुए कहा कि विश्व कप में 50 साल से चले आ रहे पदक के इंतजार को खत्म करने का यह बेहद सुनहरा मौका है।
उन्होंने कहा कि पूल में इंग्लैंड को वह अपेक्षाकृत कठिन टीम मानते हैं। अगर भारत अपने पूल में शीर्ष स्थान हासिल करता है तो उसे अगले चरण में अर्जेंटीना से सामना करना पड़ सकता है, जिसे भारतीय टीम पहले हरा चुकी है। ऐसे में सेमीफाइनल तक पहुंचने की राह भारत के लिए आसान हो सकती है।
‘अपना सर्वश्रेष्ठ खेलो और पोडियम पर जगह बनाओ’
श्रीजेश ने भारतीय खिलाड़ियों से कहा कि वे अपनी सर्वश्रेष्ठ हॉकी खेलें, खेल का आनंद लें और 50 साल का इंतजार खत्म करने का लक्ष्य लेकर मैदान पर उतरें।
उनका संदेश साफ है- अपेक्षाओं के दबाव को पीछे छोड़ें, मैदान के बाहर की चर्चाओं को भूलें और अपना पूरा ध्यान प्रदर्शन पर लगाएं।
भारतीय हॉकी टीम के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती विश्व कप में लंबे समय से चले आ रहे पदक के सूखे को खत्म करने की है। श्रीजेश का मानना है कि टीम के पास इस बार ऐसा करने का बेहतरीन मौका है।
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