CWG 2026: भारत के पैरा एथलीटों ने रचा इतिहास, एक ही गेम्स में जीते 7 मेडल; पहली बार बना ऐसा रिकॉर्ड
ग्लासगो में 28 सदस्यीय भारतीय पैरा दल ने 3 गोल्ड, 2 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज के साथ अभियान खत्म किया; 2002 से अब तक के कुल पदकों की बराबरी एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स में कर दी
ग्लासगो। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय पैरा एथलीटों ने ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने पिछले सभी संस्करणों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। ग्लासगो में उतरे 28 सदस्यीय भारतीय पैरा दल ने कुल 7 पदक अपने नाम किए। इनमें 3 गोल्ड, 2 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज शामिल रहे।
सबसे खास बात यह है कि भारतीय पैरा एथलीटों ने एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स में जितने पदक जीते, उतने ही पदक भारत ने 2002 में पैरा स्पर्धाओं की शुरुआत से लेकर 2022 तक सभी संस्करणों को मिलाकर जीते थे।
कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा स्पर्धाओं को पहली बार 2002 में शामिल किया गया था। इसके बाद भारत ने अब तक कुल 1 गोल्ड, 2 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज, यानी 7 पदक जीते थे। लेकिन ग्लासगो में भारतीय पैरा एथलीटों ने सिर्फ एक संस्करण में ही इस आंकड़े की बराबरी कर इतिहास रच दिया।
20 साल बाद ट्रैक एंड फील्ड में भारत की वापसी
ग्लासगो गेम्स भारतीय पैरा एथलेटिक्स के लिए भी बेहद खास रहे। करीब 20 साल के अंतराल के बाद भारत ने ट्रैक एंड फील्ड में पदक हासिल किया।
भारत के लिए इससे पहले 2006 कॉमनवेल्थ गेम्स में रंजीत कुमार ने चक्का फेंक स्पर्धा में पदक जीता था। इसके बाद ग्लासगो में भारतीय पैरा एथलीटों ने ट्रैक एंड फील्ड में शानदार वापसी की।
पुरुषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा में दिलीप महादु गावित ने गोल्ड मेडल जीता, जबकि इसी इवेंट में मोहम्मद बासिल मोरसिंगानाकाथ ने सिल्वर मेडल हासिल किया।
शॉट पुट में भी भारत का दबदबा
भारतीय पैरा एथलीटों ने शॉट पुट में भी शानदार प्रदर्शन किया।
पुरुषों की शॉट पुट एफ57 स्पर्धा में सोमन राणा ने गोल्ड मेडल जीता, जबकि इसी स्पर्धा में शुभम जुयाल ने सिल्वर पदक अपने नाम किया।
महिलाओं की शॉट पुट एफ57 में शर्मिला ने गोल्ड मेडल जीता और शिल्पा शयाला ने ब्रॉन्ज पदक हासिल किया।
इस तरह ट्रैक एंड फील्ड से ही भारत के पदकों की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ।
पैरा पावरलिफ्टिंग में भी मिला मेडल
ट्रैक एंड फील्ड के अलावा भारत ने पैरा पावरलिफ्टिंग में भी पदक हासिल किया। पुरुष हैवीवेट वर्ग में झंडू कुमार ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत के खाते में एक और पदक जोड़ा।
इस तरह भारतीय पैरा दल ने ग्लासगो में 3 स्वर्ण, 2 रजत और 2 कांस्य के साथ अपना अभियान समाप्त किया।
बर्मिंघम से पांच पदक ज्यादा
भारतीय पैरा एथलीटों का ग्लासगो प्रदर्शन 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स की तुलना में भी काफी बेहतर रहा। बर्मिंघम में भारत ने पैरा स्पर्धाओं में कुल 2 पदक जीते थे।
इनमें पैरा टेबल टेनिस में भाविना पटेल ने गोल्ड और सोनलबेन पटेल ने ब्रॉन्ज पदक हासिल किया था।
वहीं पैरा पावरलिफ्टिंग में सुधीर ने शुरुआत में गोल्ड मेडल जीता था, लेकिन बाद में एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन के कारण उनका स्वर्ण पदक वापस ले लिया गया था।
ग्लासगो में 7 पदकों के साथ भारत ने बर्मिंघम के मुकाबले 5 पदक अधिक हासिल किए और पैरा स्पोर्ट्स में अपने प्रदर्शन को नई ऊंचाई दी।
एक गेम्स में 7 मेडल, भारत के पैरा स्पोर्ट्स का नया अध्याय
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय पैरा एथलीटों की उपलब्धि सिर्फ पदकों की संख्या तक सीमित नहीं है। इस प्रदर्शन ने भारत के पैरा स्पोर्ट्स के बढ़ते स्तर को भी दिखाया है।
एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स में 7 पदक जीतना और पिछले सभी संस्करणों में जीते कुल 7 पदकों की बराबरी करना भारतीय पैरा खेल इतिहास की बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गया है।
