Tejaswin Shankar: तेजस्विन शंकर ने रचा इतिहास, डेकाथलॉन में मेडल जीतने वाले बने पहले भारतीय; ग्लासगो में कांस्य पर कब्जा

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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दो दिनों तक चली 10 स्पर्धाओं वाली डेकाथलॉन में तेजस्विन शंकर ने 7,976 अंक जुटाए; ग्रेनाडा के लिंडन विक्टर ने गोल्ड और कनाडा के डेमियन वार्नर ने सिल्वर जीता

ग्लासगोः चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भारतीय एथलीट तेजस्विन शंकर ने ऐसा कारनामा कर दिखाया, जो राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में पहली बार हुआ। 27 वर्षीय तेजस्विन ने पुरुषों की डेकाथलॉन स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह कॉमनवेल्थ गेम्स की पुरुष डेकाथलॉन में पदक हासिल करने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं।

दो दिनों तक चली इस बेहद कठिन स्पर्धा में तेजस्विन ने कुल 7,976 अंक हासिल किए। इस दौरान उन्हें 10 अलग-अलग इवेंट में अपनी गति, ताकत, तकनीक और सहनशक्ति का प्रदर्शन करना पड़ा।

तेजस्विन टार्गेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) के डेवलपमेंट एथलीट हैं और उनका यह प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

पोडियम पर लिंडन विक्टर और डेमियन वार्नर के साथ तेजस्विन

डेकाथलॉन का स्वर्ण पदक ग्रेनाडा के लिंडन विक्टर ने 8,096 अंक हासिल कर अपने नाम किया। कनाडा के स्टार एथलीट डेमियन वार्नर 8,036 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें सिल्वर मेडल मिला।

तेजस्विन ने 7,976 अंकों के साथ तीसरा स्थान हासिल किया और कांस्य पदक अपने नाम किया। इन दोनों दिग्गज एथलीटों के साथ पोडियम साझा करना उनके करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल हो गया।

हालांकि यह तेजस्विन का कॉमनवेल्थ गेम्स में पहला पदक नहीं है। इससे पहले उन्होंने बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुषों की हाई जंप स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था। लेकिन इस बार उन्होंने एक नहीं, बल्कि 10 अलग-अलग स्पर्धाओं में लगातार प्रदर्शन करते हुए डेकाथलॉन का पदक हासिल किया।

पहले दिन 4,339 अंक लेकर दूसरे स्थान पर थे

तेजस्विन के डेकाथलॉन अभियान की शुरुआत 100 मीटर दौड़ से हुई। उन्होंने यह रेस 10.96 सेकंड में पूरी की और 870 अंक हासिल किए।

इसके बाद लॉन्ग जंप में उनका शानदार प्रदर्शन देखने को मिला। उन्होंने 7.82 मीटर की छलांग लगाई, जो उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। इस प्रयास से उन्हें 1,015 अंक मिले।

हाई जंप में तेजस्विन ने अपनी विशेषज्ञता का परिचय देते हुए 2.15 मीटर की ऊंचाई पार की और 944 अंक हासिल किए।

पहले दिन की समाप्ति तक उनके खाते में 4,339 अंक थे। वह अंक तालिका में दूसरे स्थान पर थे और शीर्ष पर मौजूद कनाडा के डेमियन वार्नर से सिर्फ 14 अंक पीछे थे।

दूसरे दिन थकान के बावजूद जारी रखा शानदार प्रदर्शन

दूसरे दिन प्रतियोगिता और मुश्किल हो गई। लगातार स्पर्धाओं के कारण एथलीटों के शरीर पर थकान हावी होने लगी थी, लेकिन तेजस्विन ने अपना संघर्ष जारी रखा।

उन्होंने 110 मीटर हर्डल्स रेस को 14.41 सेकंड में पूरा किया और 922 अंक हासिल किए। इसके बाद डिस्कस थ्रो में उन्होंने 40.44 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया, जिससे उन्हें 674 अंक मिले।

पोल वॉल्ट में तेजस्विन ने 4.30 मीटर की छलांग लगाई और 702 अंक जुटाए। इसके बाद जैवलिन थ्रो में उन्होंने इस सीजन का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 53.12 मीटर का थ्रो किया। इससे उन्हें 635 अंक मिले।

जैवलिन थ्रो के बाद तेजस्विन निर्णायक 1500 मीटर रेस से पहले तीसरे स्थान पर मजबूत स्थिति में पहुंच चुके थे।

1500 मीटर में पूरी ताकत लगाकर जीता कांस्य

डेकाथलॉन की आखिरी और निर्णायक स्पर्धा 1500 मीटर दौड़ थी। दो दिनों की लगातार दौड़, कूद और थ्रो के बाद शरीर पर थकान काफी बढ़ चुकी थी, लेकिन तेजस्विन ने अंतिम चुनौती भी पूरी ताकत के साथ स्वीकार की।

उन्होंने 1500 मीटर रेस 4 मिनट 36.19 सेकंड में पूरी की और इसके लिए 704 अंक हासिल किए।

इन अंकों के साथ उनका कुल स्कोर 7,976 पहुंच गया और उन्होंने कांस्य पदक पक्का कर लिया।

एक मेडल से कहीं बड़ी है तेजस्विन की उपलब्धि

तेजस्विन शंकर का यह कांस्य पदक इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स की डेकाथलॉन स्पर्धा में भारत को पहली बार पदक दिलाया है।

हाई जंप में पहले ही कॉमनवेल्थ पदक जीत चुके तेजस्विन ने इस बार 10 अलग-अलग स्पर्धाओं वाली चुनौती को पूरा करके अपनी बहुमुखी प्रतिभा साबित की। उनका प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स में डेकाथलॉन जैसी बहु-स्पर्धात्मक प्रतियोगिताओं के लिए नई उम्मीद पैदा करता है।

पीएम मोदी ने दी बधाई

 

पीएम मोदी ने तेजस्विन शंकर को बधाई देते हुए कहा कि ''भारतीय खिलाड़ी लगातार इतिहास रच रहे हैं और देश का मान बढ़ा रहे हैं! तेजस्विन शंकर ने ग्लासगो CWG में पुरुषों के डेकाथलॉन इवेंट में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता है। उन्होंने 10 इवेंट्स में शानदार ऑल-राउंड प्रदर्शन किया। उन्हें बधाई। वे ऐसे ही कामयाबी हासिल करते रहें। मेरी शुभकामनाएं।''

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