महाकाल में बदला भस्म आरती का समय, भारी भीड़ के चलते इन दिनों में ही कावड़ियों के लिए जल अर्पण की विशेष व्यवस्था
महाकाल मंदिर में भस्म आरती के समय में बदलाव किया गया है। सावन में बढ़ती श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की भीड़ को देखते हुए विशेष व्यवस्था की गई है, जिससे कांवड़िए निर्धारित दिनों में भगवान महाकाल को जल अर्पित कर सकेंगे।
उज्जैन। मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण मास के पहले दिन श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ा। कड़ी सुरक्षा और व्यापक व्यवस्थाओं के बीच गुरुवार को दो लाख 23 हजार 542 श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के दर्शन किए। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अनुसार श्रावण मास में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है।
श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सुगम दर्शन के लिए मंदिर प्रबंध समिति, जिला प्रशासन, पुलिस तथा अन्य विभागों ने पार्किंग, जूता स्टैंड, 250 रुपये के शीघ्र दर्शन टिकटधारकों, कांवड़ यात्रियों, जल अर्पण, भस्म आरती तथा विभिन्न दर्शन मार्गों पर बैरिकेडिंग, संकेतक बोर्ड और सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए हैं।
भगवान महाकाल की भस्म आरती का समय बदला
समिति के अनुसार श्रावण-भादौ मास के दौरान 30 जुलाई से सात सितंबर तक प्रतिदिन भगवान महाकाल की भस्म आरती के लिए मंदिर के पट प्रातः तीन बजे खुलेंगे, जबकि प्रत्येक सोमवार को पट प्रातः दो बजकर 30 मिनट पर खुलेंगे। भस्म आरती प्रतिदिन प्रातः तीन से पांच बजे तथा सोमवार को प्रातः दो बजकर 30 मिनट से चार बजकर 30 मिनट तक होगी। आठ सितंबर से मंदिर की समय व्यवस्था पूर्ववत लागू कर दी जाएगी।
इन जगहों से दर्शन होंगे सुगम
सामान्य दर्शन व्यवस्था के तहत श्रद्धालु त्रिवेणी संग्रहालय के समीप से नंदी द्वार, श्री महाकाल महालोक, मानसरोवर भवन, फेसिलिटी सेंटर-1, टनल परिसर, कार्तिक मंडपम और गणेश मंडपम होते हुए दर्शन करेंगे। नीलकंठ प्रवेश द्वार से आने वाले श्रद्धालु भी निर्धारित मार्ग से दर्शन कर निर्गम द्वार अथवा नवीन आपातकालीन निकास से बाहर निकलेंगे। जल अर्पण की व्यवस्था सभामंडप और कार्तिकेय मंडपम में जलपात्रों के माध्यम से की गई है। शीघ्र दर्शन के लिए दो अलग-अलग मार्ग निर्धारित किए गए हैं।
कांवड़ यात्रियों के लिए जल अर्पण का मौका
पहला मार्ग हरसिद्धि चौराहा से द्वार क्रमांक-5 होकर तथा दूसरा द्वार क्रमांक-1 से विश्रामधाम होते हुए सभा मंडपम और गणेश मंडपम तक रहेगा। दर्शन के बाद श्रद्धालु निर्गम द्वार से बाहर निकलेंगे। कांवड़ यात्रियों के लिए विशेष व्यवस्था के तहत मंगलवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को ही जल अर्पण की अनुमति रहेगी। कांवड़ दलों को द्वार क्रमांक-1 और हरसिद्धि चौराहा स्थित विशेष दर्शन मार्ग से प्रवेश दिया जाएगा। शनिवार, रविवार और सोमवार को श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ को देखते हुए किसी भी कांवड़ दल को अनुमति नहीं दी जाएगी।
