अयोध्या मेडिकल कॉलेज में डायलिसिस टेंडर पर उठे सवाल, नियमों की अनदेखी के आरोप; जांच के आदेश

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Edited By Muskan Dixit
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3.94 करोड़ रुपये की डायलिसिस परियोजना में निविदा शर्तों में हेरफेर और एक ही वेंडर को बार-बार लाभ पहुंचाने की शिकायत

अयोध्या, अमृत विचार : राजर्षि दशरथ मेडिकल काॅलेज से अनियमितताओं और गड़बड़ी के बादल छंट नहीं रहे हैं। बीते कई वर्षों से लगातार तमाम गंभीर गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार के बाद अब मेडिकल काॅलेज में बेहद गंभीर मामला सामने आ रहा है। इस बार केवल निविदा शर्तों में ही हेरफेर नहीं बल्कि एक ही वेंडर को बार-बार लाभ पहुंचाने तथा डायलिसिस परियोजना के एमओयू का उल्लंघन व बिना किसी उच्च अधिकारी की स्वीकृति के जेम जीटीसी नियमों तक के उल्लंघन के भी गंभीर आरोप शामिल हैं।

पूरा प्रकरण डायलिसिस परियोजना के तहत स्वीकृति धनराशि 3.94 करोड़ रुपये से जुड़ा हुआ है। इसे लेकर उच्च न्यायालय के अधिवक्ता जितेन्द्र कुमार सिंह ने अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री) संजय प्रसाद से शिकायत की है।

शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में कहा है कि डायलिसिस के लिए पांच फर्म ने टेंडर डाले थे। इनमें से दो फर्मों ने पात्रता, अनुभव प्रमाण-पत्र अथवा अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए। शेष तीन प्रतिभागियों में से दो फर्म का पता तथा प्रोपराइटर का नाम समान पाए जाने का दावा किया गया है। शिकायत में आरोप है कि नाट मशीनों की खरीद एवं संबंधित कार्यों में एक ही समूह अथवा संबंधित फर्मों को करोड़ों रुपये के कार्य एवं आपूर्ति आदेश दिए गए। शिकायतकर्ता ने सक्षम जांच एजेंसी द्वारा सभी अभिलेखों का परीक्षण कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की थी। मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद ने मामले की जांच के लिए अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा से जांच उपरांत समुचित कार्रवाई की अपेक्षा की है।

-हर चीजें लखनऊ से होती हैं। मेरे पास लिखित में अभी किसी तरह की लिखित शिकायत नहीं आई है।
डॉ. डीएस मर्तोलिया, कार्यवाहक प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज

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