UP Education News : विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए योगी सरकार का बड़ा कदम, 75 जिलों में होगी खास ट्रेनिंग

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आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों और प्री-प्राइमरी नोडल शिक्षकों को दिया जाएगा प्रशिक्षण

यूपी के 75 जिलों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शुरुआती पहचान और समावेशी शिक्षा के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों व प्री-प्राइमरी नोडल शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। सरकार ने इसके लिए करीब 2.98 करोड़ रुपये की लिमिट जारी की है। ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण 1 से 30 सितंबर तक होगा।

लखनऊ, अमृत विचार। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की समय पर पहचान और उन्हें शुरुआती स्तर पर जरूरी सहयोग देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के 75 जिलों में को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यकर्त्रियों के साथ प्री-प्राइमरी नोडल शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में बच्चों की शीघ्र पहचान, शुरुआती हस्तक्षेप, समावेशी आंगनबाड़ी केंद्र और दिव्यांगता समावेशन जैसे विषयों पर विशेष जोर रहेगा।

राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय, समग्र शिक्षा की ओर से प्रशिक्षण के लिए करीब 2.98 करोड़ रुपये की लिमिट जारी की गई है। इसमें मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण के लिए 17.70 लाख रुपये और आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों के प्रशिक्षण के लिए 2.80 करोड़ रुपये शामिल हैं।

3 अगस्त से मास्टर ट्रेनर्स की ट्रेनिंग

प्रशिक्षण की शुरुआत जिला स्तर से हो चुकी है। 3 अगस्त से 30 अगस्त तक एआरपी को मास्टर ट्रेनर्स के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। ये मास्टर ट्रेनर्स आगे ब्लॉक स्तर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों और प्री-प्राइमरी नोडल शिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे। प्रशिक्षण में गतिविधि आधारित और व्यावहारिक तरीकों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए जरूरी प्रशिक्षण सामग्री और तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी।

सितंबर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की ट्रेनिंग

1 सितंबर से 30 सितंबर तक ब्लॉक स्तर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों और प्री-प्राइमरी नोडल शिक्षकों का प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य दोनों स्तरों के कार्मिकों के बीच बेहतर समन्वय विकसित करना है। इससे को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान, शुरुआती सहयोग और उनके लिए अनुकूल शिक्षण वातावरण तैयार करने की प्रक्रिया मजबूत होगी।

यूनिसेफ की मदद से तैयार सामग्री से प्रशिक्षण

प्रशिक्षण में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार और यूनिसेफ के सहयोग से तैयार सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शीघ्र पहचान एवं हस्तक्षेप, समावेशी आंगनबाड़ी केंद्र और दिव्यांगता समावेशन से जुड़े विषय शामिल होंगे। इससे कार्यकर्ताओं और शिक्षकों को बच्चों की अलग-अलग सीखने की जरूरतों को समझने और उनके अनुरूप सहयोग देने में मदद मिलेगी।

प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर रहेगी नजर

महानिदेशक स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने प्रशिक्षण की गुणवत्ता, शत-प्रतिशत प्रतिभागिता और निर्धारित समय-सीमा में कार्यक्रम पूरा कराने के निर्देश दिए हैं। जनपद स्तर पर प्रशिक्षण की नियमित निगरानी की जाएगी। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इसकी प्रगति और आख्या राज्य परियोजना कार्यालय को उपलब्ध कराई जाएगी।

बेसिक शिक्षा और बाल विकास विभाग में समन्वय पर जोर

समावेशी शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग और बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के बीच समन्वय पर विशेष जोर दिया जाएगा। दोनों स्तर के कार्मिकों के संयुक्त प्रशिक्षण से बच्चों की जरूरतों की पहचान और शैक्षिक सहयोग की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनाने का लक्ष्य है।

‘हर बच्चे को उसकी क्षमता के अनुरूप सीखने का अवसर’

बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य हर बच्चे को उसकी जरूरत और क्षमता के अनुरूप सीखने का अवसर उपलब्ध कराना है। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की समय पर पहचान और शुरुआती सहयोग उनकी शिक्षा की मजबूत नींव तैयार करने में महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों और प्री-प्राइमरी नोडल शिक्षकों का प्रशिक्षण समावेशी शिक्षा को जमीनी स्तर पर मजबूत करेगा और बच्चों के लिए सुरक्षित, सहयोगी एवं अनुकूल सीखने का वातावरण तैयार करने में मदद करेगा।

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