बरेली: परसाखेड़ा की हकीकत देखी, जलभराव से लबालब मिलीं सड़कें

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अमृत विचार, बरेली। परसाखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया की कई सड़कें सालों से क्षतिग्रस्त हैं। बड़ा नाला नहीं होने से सड़कें जलभराव से लबालब रहती हैं। इससे उद्यमियों को कई तरह की समस्याएं उठानी पड़ती हैं। कई बार उद्यमियों ने सड़कों के क्षतिग्रस्त होने का मामला जिलाधिकारी के समक्ष उठाया। सौ दिन सौ उद्योग स्थापित कराने के …

अमृत विचार, बरेली। परसाखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया की कई सड़कें सालों से क्षतिग्रस्त हैं। बड़ा नाला नहीं होने से सड़कें जलभराव से लबालब रहती हैं। इससे उद्यमियों को कई तरह की समस्याएं उठानी पड़ती हैं। कई बार उद्यमियों ने सड़कों के क्षतिग्रस्त होने का मामला जिलाधिकारी के समक्ष उठाया। सौ दिन सौ उद्योग स्थापित कराने के अभियान में दो बैठकें हुईं, उसमें भी उद्यमियों ने खराब सड़कों का मुद्दा उठाया। उद्यमियों की शिकायतों पर गौर करते हुए जिलाधिकारी नितीश कुमार ने परसाखेड़ा क्षेत्र की सड़कों का निरीक्षण कर क्षतिग्रस्त सड़कों की स्थिति दर्शाते हुए अन्य समस्याओं को शामिल करते हुए जिला उद्योग केंद्र और यूपीसीडा के अधिकारियों को रिपोर्ट देने के निर्देश दिये।

गुरुवार दोपहर संयुक्त आयुक्त उद्योग ऋ षि रंजन गोयल, यूपी राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) के इंजीनियर सीपी शर्मा समेत कई अन्य अधिकारी परसाखेड़ा पहुंचे। अधिकारियों ने आईआईए चैप्टर के अध्यक्ष पीयूष कुमार अग्रवाल, लघु उद्योग भारती एसोसिएशन के अध्यक्ष एसके सिंह, उद्यमी सुरेश सुंदरानी, उद्यमी मयूर धीरवानी और सुशील कुमार के साथ परसाखेड़ा एरिया की सड़कों की स्थिति देखी।

इंडस्ट्रियल एरिया की एक नंबर, दो नंबर, तीन नंबर और चार नंबर सड़कों का निरीक्षण किया। कई सड़कें उखड़ी थीं। गड्ढों में जलभराव भी था। इस दौरान उद्यमियों ने गैस प्लांट के टैंकरों के सड़क पर बेतरतीब खड़े होने से सड़क के घिरी रहने और पटरी पर ग्रिल लगाने से जाम की समस्या उत्पन्न होने का मुद्दा भी उठाया।

इस पर संयुक्त आयुक्त उद्योग ने गैस प्लांट के अधिकारियों को सड़क खाली करने के निर्देश देते हुए टैंकरों के खड़ा करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी। उद्यमियों ने बताया कि परसाखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया में नगर निगम बड़ा नाला बना रहा है लेकिन वन विभाग की एनओसी न मिलने से नाला अधूरा है। इससे छोटे नाले लबालब होने पर पानी सड़कों पर बहता है। चार साल से नाला निर्माण लटका हुआ है।

नगर निगम में जमा टैक्स से बनेंगी परसाखेड़ा की सड़कें
वर्ष 2009 से परसाखेड़ा इंडस्ट्रियल की फैक्ट्रियों से यूपीसीडा कर नहीं वसूल रहा है। राज्य सरकार ने व्यवस्था में बदलाव करते हुए कर वसूलने का अधिकार नगर निगम को सौंप दिया था। तब से नगर निगम के खाते में कर जमा होता है।

यूपीसीडा के क्षेत्रीय प्रबंधक संतोष कुमार ने बताया कि करीब 11 साल से नगर निगम के खाते में जो कर का रुपया जमा है, उसमें से करीब 65 प्रतिशत धनराशि से ही सड़कों का निर्माण होना है। धन कितना जमा है, इसके बारे में नगर निगम के अधिकारी ज्यादा सटीक जानकारी दे सकते हैं। 2009 में एक एग्रीमेंट हुआ था, उसमें स्पष्ट लिखा है कि जमा कर की धनराशि का 65 प्रतिशत सड़कों के निर्माण पर खर्च होगा।

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