हल्द्वानी: एमबीपीजी कॉलेज की छात्रा ने संभागीय खाद्य नियंत्रक रयाल पर किया शोध
हल्द्वानी,अमृत विचार। एमबीपीजी कॉलेज के हिंदी विभाग की शोध छात्रा मीना ने लेखक और संभागीय खाद्य नियंत्रक पद पर तैनात ललित मोहन रयाल के व्यक्तित्व और कृतित्व पर शोध कार्य पूर्ण किया है। एक कार्यक्रम के दौरान उन्हें शोध प्रबन्ध प्रदान किया। यह शोध कार्य एमबीपीजी के हिंदी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डा. जयश्री भण्डारी …
हल्द्वानी,अमृत विचार। एमबीपीजी कॉलेज के हिंदी विभाग की शोध छात्रा मीना ने लेखक और संभागीय खाद्य नियंत्रक पद पर तैनात ललित मोहन रयाल के व्यक्तित्व और कृतित्व पर शोध कार्य पूर्ण किया है। एक कार्यक्रम के दौरान उन्हें शोध प्रबन्ध प्रदान किया। यह शोध कार्य एमबीपीजी के हिंदी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डा. जयश्री भण्डारी के निर्देशन में किया गया है। कार्यक्रम में शोध छात्रा ने अपने शोध कार्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि शोध प्रबंध के प्रथम खण्ड में लेखक रयाल के गढ़वाल अंचल में जन्म,पढ़ाई-लिखाई तथा उनके सामाजिक परिवेश पर चर्चा की गई है।
उनकी प्रारंभिक शिक्षा टिहरी गढ़वाल में, माध्यमिक और उच्च शिक्षा ऋषिकेश में हुई। एमएससी गणित और एमए इतिहास विषय में नेट, जेआरएफ परीक्षा उत्तीर्ण की। रयाल ने चमोली जनपद में एक वर्ष प्राध्यापक के रूप में कार्य किया। उसके उपरांत उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से संपरीक्षा अधिकारी के पद पर उनका चयन हुआ। इस पद पर उन्होंने 6 वर्ष तक इलाहाबाद में अपनी सेवा दी।
उत्तराखंड राज्य गठन के बाद ललितमोहन रयाल ने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (पीसीएस) परीक्षा टॉप किया और डिप्टी कलेक्टर के पद पर कार्यभार ग्रहण किया। शोध प्रबंध के दूसरे खण्ड में साहित्यकार ललितमोहन रयाल की साहित्यिक यात्रा का अनुशीलन किया गया है। जिसमें उनकी कृतियों खड़कमाफी की स्मृतियों से और अथ श्री प्रयागकथा पर विशद चर्चा है। लेखक ने खड़कमाफी की स्मृतियों से रचना में अपने बचपन की स्मृतियों को तीस अध्यायों में मार्मिक और रोचक ढंग से प्रस्तुत किया है।
लेखक की दूसरी रचना अथ श्री प्रयाग कथा में उन तमाम युवकों का वर्णन किया है जो प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से रोजगार की तलाश में प्रयागराज पदार्पित होते हैं, इस उम्मीद के साथ कि एक न एक दिन लक्ष्य प्राप्ति अवश्य होगी।इस पुस्तक में लेखक ने युवाओं के मानसिक अंतर्द्वंद्व को मनोविश्लेषणात्मक तरीके से प्रस्तुत किया है। लेखक स्वयं लोक सेवा में हैं, उन्होंने अपने जीवन में विभिन्न संघर्षों को झेला है और साथ ही साथ अपने संग रहने वाले युवाओं को हर परेशानी को झेलते हुए देखा है। शोध छात्रा मीना को शोध कार्य हेतु विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से जूनियर रिसर्च फेलोशिप प्राप्त हो रही है।
लेखक ललित मोहन रयाल ने अपने संबोधन में कहा कि लेखन कर्म दायित्वबोध से युक्त गंभीर कर्म है।किसी विसंगति, विद्रूपता या विडम्बना को लक्षित कर त्वरित या सोच विचार के उपरांत की गई कोई टिप्पणी या किया गया लेखन व्यंग्य रचना के रूप में सामने आता है। कोई भी असंगति किसी संवेदनशील मनुष्य की चेतना को निश्चित रूप से छुएगी। कार्यक्रम का संचालन डॉ दीपा गोबाड़ी ने तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ विमला सिंह ने किया। इस अवसर पर डॉ प्रभा पंत, डॉ सन्तोष मिश्र, डॉ देवयानी भट्ट, डॉ चंद्रा खत्री, डॉ जगदीश चंद्र जोशी, डॉ आशा हरबोला, भीम सिंह आदि मौजूद रहे।
