शाहजहांपुर: हालात के आगे हार न मानने वाले रामस्वरूप

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ज्ञान‍ेंद्र सिंह यादव/शाहजहांपुर। राम स्वरूप नगर पालिका शाहजहांपुर ( अब नगर निगम) के रिटायर्ड कर्मचारी हैं। उम्र के 71वें पड़ाव पर हैं लेकिन हौसले 17 साल के लड़के जैसै। मानो मतदाता सूची में नाम दर्ज होने से ठीक एक साल पहले की अवस्था। रिटायरमेंट के 10 साल बाद भी वह गांधी भवन प्रेक्षागृह में सफाई …

ज्ञान‍ेंद्र सिंह यादव/शाहजहांपुर। राम स्वरूप नगर पालिका शाहजहांपुर ( अब नगर निगम) के रिटायर्ड कर्मचारी हैं। उम्र के 71वें पड़ाव पर हैं लेकिन हौसले 17 साल के लड़के जैसै। मानो मतदाता सूची में नाम दर्ज होने से ठीक एक साल पहले की अवस्था। रिटायरमेंट के 10 साल बाद भी वह गांधी भवन प्रेक्षागृह में सफाई करने आते हैं। हालांकि पेंशन और काम करने के बदले रुपये मिलते हैं।

गांधी भवन के मुख्य दरवाजे के किनारे खाना खाने के बाद दवाई खाकर आराम करने के बीच उन्होंने अपने 70 साल की जिंदगी एक बार फिर जी ली। राम स्वरूप का जीवन हालातों के सामने घुटने टेक देने वालों के लिए एक मिशाल है।

71वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जब देशभर में इसके जश्न की तैयारियां अपने अंतिम चरण में थी। ठीक उसी वक्त शहर के लाला तेली बजरिया निवासी 70 वर्षीय राम स्वरूप बुखार, खांसी व बुढ़ापे के अन्य रोगों की दवाई खाकर गांधी भवन में सफाई कर रहे थे। रिटायर होने के 10 वर्ष बाद भी बीमारी की हालत में सफाई करने पर बताया कि बेटी की शादी करनी है। जवान बेटे की मौत के बाद घर की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है। नगर निगम से पेंशन मिलती है और गांधी भवन में सफाई के रुपये भी मिलते हैं।

गणतंत्र दिवस की उम्र के बराबर रामस्वरूप ने पहले और आज के दौर की तुलना करने पर बताया कि शहर ने बहुत तरक्की कर ली। 70 साल पीछे की जिंदगी में झांकने पर बताया कि गांधी भवन उनके सामने ही सेठ विशन सिंह के भाई की देखरेख में बना। उस समय गांधी भवन के पीछे से एक रास्ता था। आज उसी रास्ते से तीन-तीन गलियां बन गईं हैं। शहर ने तरक्की की तो लोगों के रहन सहन में भी आधुनिकता आ गई। इस बदलाव से रामस्वरूप संतुष्ट हैं या नहीं इसका जबाव खुद उनके पास भी नहीं है।

बस ढलती उम्र, कंधे पर जिम्मेदारियों का बोझ, जवान बेटे की मौत का गम और बीमारियों के बीच राम स्वरूप गणतंत्र की तरह ही बस चल रहे हैं। गंदगी साफ कर लोगों के लिए स्वच्छ वातावरण बनाया। लेकिन गणतंत्र के 70 साल बीतने के बाद राम स्वरूप की जिंदगी में कोई बदलाव नहीं आया। हालात के आगे हिम्मत न हारने वाले राम स्वरूप रिटायर्ड होने के 10 वर्ष बाद भी झाड़ू लगाने को मजबूर है। गणतंत्र दिवस की बधाई देने पर अपनी झाड़ू की तरफ देखकर मुस्कुराए और सिर्फ इतना ही कहा- अखबार वाले लग रहे हो, ये छापोगे क्या?

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