कन्या अपने घर आंगन में मातृशक्ति प्रतिबिंब रही… अब दहेज दानव के चलते बोझ बनी अभिशप्त हुई
कहां स्वयंबर की परिपाटी कहां अर्धनारीश्वर भाव रही वंदिता मातृ शक्तियां अपनी संस्कृति अपना स्वभाव। कन्या अपने घर आंगन में मातृशक्ति प्रतिबिंब रही सृजनस्वरूपा शक्तिस्वरूपा जगत सृष्टि अवलंब रही दया स्नेह ममता करुणा की मूर्ति रही पूज्या नारी जीवन संगिनि अर्धांगिनि थी पति परमेश्वर की अतिशय प्यारी अब दहेज दानव के चलते बोझ बनी अभिशप्त …
कहां स्वयंबर की परिपाटी
कहां अर्धनारीश्वर भाव
रही वंदिता मातृ शक्तियां
अपनी संस्कृति अपना स्वभाव।
कन्या अपने घर आंगन में
मातृशक्ति प्रतिबिंब रही
सृजनस्वरूपा शक्तिस्वरूपा
जगत सृष्टि अवलंब रही
दया स्नेह ममता करुणा की
मूर्ति रही पूज्या नारी
जीवन संगिनि अर्धांगिनि थी
पति परमेश्वर की अतिशय प्यारी
अब दहेज दानव के चलते
बोझ बनी अभिशप्त हुई
सचमुच कलियुग की बलिहारी
गृहलक्ष्मी आज विपन्न हुई
लोभ बढ़ा सुरसा के मुंह सा
नारी कर रही नारी शोषण
सास बन रही बिषधर नागिन
बहू दंश से पीड़ित प्रतिपल
दौर भ्रूण हत्या तक आया
रौरव नरक यहीं पाओगे
धरती सुता विहीन हुई यदि
घर की बहू कहां पाओगे
भस्मासुर सा दग्ध कर रहा
यह दहेज दानव घर-घर को
इसे भस्म कर पुण्य कमाओ
अब दहेज से नाता तोड़ो
घर आंगन को स्वर्ग बनाओ।।
- ओम प्रकाश त्रिपाठी
