शहीदों को नमन, 1971 के युद्ध में मिली जीत का जश्न… लद्दाख पहुंची ‘स्वर्णिम विजय मशाल’

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लेह। भारत की 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर मिली विजय के उपलक्ष्य में निकाली गयी स्वर्णिम विजय मशाल का लद्दाख के सीमावर्ती क्षेत्र तुरतुक तथा त्याक्षी में लोगों ने बच्चों के साथ पारंपरिक बालटी नृत्य करके स्वागत किया। उल्लेखनीय है कि भारतीय सैन्य बलों की 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर जीत के इस …

लेह। भारत की 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर मिली विजय के उपलक्ष्य में निकाली गयी स्वर्णिम विजय मशाल का लद्दाख के सीमावर्ती क्षेत्र तुरतुक तथा त्याक्षी में लोगों ने बच्चों के साथ पारंपरिक बालटी नृत्य करके स्वागत किया। उल्लेखनीय है कि भारतीय सैन्य बलों की 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर जीत के इस साल दिसंबर में 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इसकी याद में स्वर्णिम विजय मशाल निकाली गयी है, जो मंगलवार को सियाचिन ग्लेशियर के जमाव बिंदु पर पहुंची थी।

रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल एम्रोन मुसवी ने बताया कि विजय मशाल समारोह के हिस्से के तौर पर तुरतुक और त्याक्षी गांवों के सैनिकों, वरिष्ठ नागरिकों, स्थानीय लोगों और स्कूली बच्चों ने बड़े उत्साह के साथ हिस्सा लिया तथा स्वर्णिम विजय मशाल को प्राप्त किया। उन्होंने इस मौके पर विजय मशाल को सलामी गारद दी तथा श्रद्धांजलि समारोह का भी आयोजन किया गया।

तुरकुत तथा त्याक्षी गांव का ऐतिहासिक महत्व है। उन्नीस सौ इकहत्तर के युद्ध में इन दोनों गावों को पाकिस्तान के अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया था। इस समय से इस क्षेत्र में काफी तेजी से आर्थिक तथा सामाजिक प्रगति हुई है तथा यह क्षेत्र लद्दाख के शीर्ष पर्यटन स्थल के तौर पर तब्दील हुआ है।

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