मानसून सत्र से पहले बोलीं मायावती- संसद में शोर नहीं, जनहित के मुद्दों पर हो बहस; राम मंदिर चढ़ावा मामले का भी किया जिक्र

Amrit Vichar Network
Edited By Deepak Mishra
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बसपा प्रमुख बोलीं- महंगाई, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा, राम मंदिर चढ़ावा मामला और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर गंभीर बहस हो; संसद स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप चले

बसपा प्रमुख मायावती ने संसद के मानसून सत्र के शांतिपूर्ण संचालन की अपील करते हुए कहा कि हंगामे की बजाय महंगाई, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा, पेपर लीक और राम मंदिर चढ़ावा जैसे जनहित के मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।

नई दिल्ली/लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र को स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप शांतिपूर्ण और सुचारू ढंग से चलाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि संसद में बार-बार के हंगामे और स्थगन की बजाय जनहित से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।

रविवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर किए गए पोस्ट में मायावती ने कहा कि देश इस समय महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा, पेपर लीक समेत कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में संसद का समय इन समस्याओं के समाधान खोजने में लगाया जाना चाहिए।

राम मंदिर चढ़ावा मामले का भी किया जिक्र

बसपा प्रमुख ने अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मुद्दे को लेकर व्यापक जनचर्चा और आक्रोश है। उन्होंने कहा कि इसकी गूंज सड़कों से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है और संसद में भी इस विषय पर चर्चा होने की संभावना है।

महिला सुरक्षा और भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाए

मायावती ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति, राजस्थान में गर्भवती महिलाओं की मौत, विभिन्न राज्यों में महिला असुरक्षा, सरकारी योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार, पुलिस मुठभेड़ों और अतिक्रमण हटाने के दौरान बस्तियों के ध्वस्तीकरण जैसे मुद्दों का भी उल्लेख किया।

अंतरराष्ट्रीय हालात पर भी जताई चिंता

उन्होंने कहा कि अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष तथा रुपये के अवमूल्यन जैसे अंतरराष्ट्रीय और आर्थिक घटनाक्रमों का भारत की अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन पर प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे विषयों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर देशहित में मिलकर समाधान तलाशना चाहिए।

मायावती ने कहा कि मौजूदा सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए संसद का मानसून सत्र बिना किसी उत्तेजना, रोष या विद्वेष के स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप संचालित होना समय की आवश्यकता है। उन्होंने सभी संस्थाओं से भी आम जनता की समस्याओं को कम करने और जनहित में प्रभावी भूमिका निभाने का आग्रह किया।

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