लखनऊ: सफाई के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा, नगर आयुक्त ने लिया संज्ञान, दिए ये निर्देश
लखनऊ। राजधानी में सफाई के नाम पर फर्जीवाड़ा कर नगर निगम को आर्थिक चोट पहुंचाने वाली कार्यदायी संस्थाओं की जांच की जाएगी। अमृत विचार की खबर को संज्ञान में लेते हुए नगर आयुक्त अजय कुमार द्विवेदी ने कार्यदायी संस्थाओं की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। जांच में दोषी पायी जाने वाली कार्यदायी संस्थाओं को …
लखनऊ। राजधानी में सफाई के नाम पर फर्जीवाड़ा कर नगर निगम को आर्थिक चोट पहुंचाने वाली कार्यदायी संस्थाओं की जांच की जाएगी। अमृत विचार की खबर को संज्ञान में लेते हुए नगर आयुक्त अजय कुमार द्विवेदी ने कार्यदायी संस्थाओं की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। जांच में दोषी पायी जाने वाली कार्यदायी संस्थाओं को ब्लैक लिस्ट करने के साथ उनसे रिकवरी की जाएगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कार्यदायी संस्थाओं के कर्मचारियों से लेकर भुगतान के माध्यम की जांच कर रिपोर्ट मांगी है।
नगर आयुक्त के संज्ञान में आ रहा था कि नगर निगम में मैनपावर सप्लाई करने वाली कार्यदायी संस्थाओं के सफाई कर्मचारी फील्ड में नहीं मिलते हैं। नगर आयुक्त ने स्वयं कई बार फील्ड पर जाकर कर्मचारियों का सत्यापन किया लेकिन उन्हें मौके पर आधे से भी कम कर्मचारी मिले। नगर निगम द्वारा शहर में सफाई व्यवस्था को चुस्त रखने के लिए कार्यदायी संस्थाओं के माध्यम से लगभग 8 हजार सफाई कर्मचारी लगाए गए हैं। इनमें से कुछ रसूखदार कार्यदायी संस्थाओं के माध्यम से डेढ़ से 2 हजार कर्मचारी लगाए गए हैं।
जांच में मौके पर आधे भी कर्मचारी नहीं मिलते हैं लेकिन इन कार्यदायी संस्थाओं द्वारा पूरे कर्मचारियों का भुगतान करा लिया जाता है। इसमें नगर निगम के अधिकारियों से लेकर बाबुओं का भी हिस्सा होता है। शासन से लेकर राजनेताओं तक पहुंच के कारण इन पर जुर्माना लगाने के अलावा कोई बड़ी कार्रवाई नहीं होती है। सफाई के कार्य में मोटा मुनाफा देखते हुए विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी बैकडोर से अपनी फर्में बनाकर सफाई का काम लिया है।
नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग का बाबू सत्यव्रत यादव आर्ना एसोसिएट के नाम से सफाई कार्य करा रहा था। मामला खुलते देख नगर आयुक्त ने फर्म को फिलहाल ब्लैक लिस्ट कर दिया है। कार्यदायी संस्थाओं द्वारा नगर निगम को लगभग 1 कराड़ रुपये प्रतिमाह का चूना लगाया जा रहा है। अब इस फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद नगर आयुक्त ने पूरे मामले की जांच कराने की तैयारी शुरू कर दी है। लेकिन इन कार्यदायी संस्थाओं के रसूख के आगे निष्पक्ष जांच हो पाना तो दूर लीपापोती की संभावना ज्यादा दिखाई दे रही है।
