प्रयागराज बाढ़: गंगा व यमुना खतरे के निशान से पार, कई इलाकों में बाढ़
प्रयागराज। राजस्थान ,मध्य प्रदेश के अलावा बुलंदशहर के नरौरा बांध से छोड़े गये पानी के कारण प्रयागराज में गंगा और यमुना उफान पर हैं, जिसके कारण यहां तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का पानी जमा हो गया। बाढ़ नियंत्रण कक्ष के आंकडो के अनुसार गंगा का जलस्तर फाफामऊ में सुबह आठ बजे 85.08 मीटर दर्ज किया …
प्रयागराज। राजस्थान ,मध्य प्रदेश के अलावा बुलंदशहर के नरौरा बांध से छोड़े गये पानी के कारण प्रयागराज में गंगा और यमुना उफान पर हैं, जिसके कारण यहां तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का पानी जमा हो गया। बाढ़ नियंत्रण कक्ष के आंकडो के अनुसार गंगा का जलस्तर फाफामऊ में सुबह आठ बजे 85.08 मीटर दर्ज किया गया था ।
गंगा का जलस्तर चार घंटे में आठ सेंटीमीटर बढ़कर 85.17 मीटर हो गया। छतनाग में गंगा अपने लाल निशान से 31 सेंटीमीटर ऊपर 84.42 मीटर पर बह रही हैं। यमुना भी लाल निशान से 28 सेंटीमीटर ऊपर हैं। सुबह आठ बजे यमुना का जलस्तर 84.90 मीटर था जो 12 बजे बढ़कर 85.01 मीटर दर्ज किया गया है। दोनो नदियों का जलस्तर ढाई से तीन सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है।
जिलाधिकारी संजय कुमार खत्री ने बाढ प्रभावित क्षेत्रों को दारागंज से एनडीआरएफ टीम के साथ नाव से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर प्रभावित लोगों से मुलाकात की। बाढ़ पीडितों को आश्रय देने के लिए जिला प्रशासन ने ऋषिकुल उत्तर माध्यमिक विद्यालय और कैंट हाईस्कूल में राहत शिविर बनाये है। इन शिविरों में 1500 से अधिक बाढ़ पीड़ितों को ठहराया गया है। इसके अलावा भीड़ होने पर वाईएमसीए में स्थापित शिविर में भी कुछ लोगों को भेजा गया है।
जिलाधिकारी ने बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात कर मिल रही सुविधाओं की जानकारी ली। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में एनडीआरएफ,एसडीआरएफ और जल पुलिस के जवान लगातार भ्रमण कर रहे हैं। यमुनापुल के पास झोपड़ी बनाकर रहने वाले करीब 100 परिवारों को वहां से हटाकर सुरक्षित जगहों पर भेज दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस वेग से गंगा और यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है उससे डर लगने लगा है क्यों कि कही 1978 की पुर्नवृत्ति न/न हो जाए।
उस समय गंगा और यमुना का जलस्तर खतरे के निशान 84.73 मीटर से करीब चार मीटर ऊपर चला गया था जिससे शहरी क्षेत्रों के साथ जिले के कई इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया था। उस समय फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 87.98 मीटर पर दर्ज किया गया था जबकि छतनाग में 88 मीटर को पार गयी थी।
इसी प्रकार यमुना का जलस्तर 87.99 मीटर पर बह रही थीं। गंगा और यमुना वर्ष 2013 और 2017 में भी उफन पर थीं लेकिन 1978 जैसी स्थिति नहीं बनी थी। रविवार रात गंगा और यमुना खतरे के निशान को पार गयी। हमीरपुर में केन और बेतवा के खतरे के निशान से ऊपर है।
उन्होंने बताया कि माताटीला बांध से तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है जबकि कानपुर बैराज से भी पानी छोड़ जाने से गंगा के जलस्तर में वृद्धी होने से शहरी क्षेत्र के 24 से अधिक मुहल्ले बाढ़ से प्रभावित हैं और जहां पहले वाहन चलते थे अब नाव चल रही हैं। गंगा और यमुना का जलस्तर बढ़ने से एहतियात के तौर पर कछारी इलाकों में रहने वालों की बिजली आपूर्ति बन्द कर दी गयी है। चार उपकेन्द्र पानी में डूब गये हैं।
बक्शी खुर्द में 33 हजार की लाइन डूबने की बजह से कई मुहल्लों की आपूर्ति दूसरे उप केन्द्रों से की जा रही है। प्रयागराज में आसपास के दूर दराज से अपने प्रियजनों काे गंगा तट श्मशान घाट रसूलाबाद और दारागंज घाट पर अंतिम संस्कार करने आने वाले लोगों को बाढ़ के कारण परेशानी उठानी पड़ रही है और घाट के बजाए गलियों में चिता जलाई जा रही है।
गंगा और यमुना का जलसतर बढ़ने के कारण कछार के द्रोपदी घाट, म्योराबाद,बेली, कछार, गंगापुरी, नेवादा कछार, अशोकनगर कछार,राजपापुरा, ऊंचवागढ़ी, शिवकुटी, जोंधवल, शंकरघाट, बघाड़ा, चांदपुर, सलोरी, कैलाशपुरी कालोनी, चिल्ला कछार, बख्शी खुर्द, नींवा, करैलाबाग, गौंसनगर, सदियापुर समेत तीन दर्जन इलाकों में पानी घुस गया है।
इन सभी जगहों पर बिजली आपूर्ति बन्द कर दी गयी है। गंगा का जलस्तार बढने से श्रृगवेरपुर, कौड़िहार, फाफामऊ, थरवई, सोनौटी, बदरा, झूंसी, नैनी, कोटवा बेलवार, कतवारीपुर, सिरसा, हंडिया, करछना, औद्योगिक क्षेत्र के आसपास के कछारी इलाकों मे पानी भर गया है।
दारागंज, अल्लापुर,, शिवकुटी, जोंथवल, शंकरघाट, रसूलाबाद, गंगा नगर, चिल्ला, नेवादा, कैंट, राजापुर, मीरापुर, दरियाबाद, करेली, छोटा बाघड़ा, बड़ा बाघडा,फाफामऊ, अरैल, हेतापट्टी, मवैया, महेवा, मड़ौक के अलावा यमुना में पानी बढ़ने से यमुना का जलस्तर बढने से शहर से सटकर बहने वाली ससुर खदेरी नदी के तटवर्ती मुहल्लों में आदि में पानी पहुंचने से जहां लोगों मेें दहशत के बीच लोग जागकर रात बिताने पर मजबूर हैं।
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