बरेली: प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम से 20 गुना अधिक है प्लाजमोडियम वाईवैक्स के मरीज

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से निजात के बाद अब जिले में मलेरिया वार करने की तैयारी में है। स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां के बावजूद जिले में प्लाजमोडियम वाईवैक्स पांव पसार रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में अब तक 875 लोग प्लाज्मोडियम वाईवैक्स की चपेट में आ चुके …

बरेली, अमृत विचार। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से निजात के बाद अब जिले में मलेरिया वार करने की तैयारी में है। स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां के बावजूद जिले में प्लाजमोडियम वाईवैक्स पांव पसार रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में अब तक 875 लोग प्लाज्मोडियम वाईवैक्स की चपेट में आ चुके हैं। जबकि प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम के 52 ही मरीज मिले हैं। जिला मलेरिया विभाग की टीम अतिसंवेदनशील रहे इलाकों में सर्वे व फॉगिंग अभियान चला रही है।

करीब तीन साल पहले बरेली मलेरिया के मामले में सूबे में पहले स्थान पर था। वर्ष 2018 में मलेरिया के 34 हजार से ज्यादा मामले दर्ज हुए थे। मलेरिया संदिग्ध दो सौ से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी, मगर स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार महज दो ही मौतें हुई। विशेषज्ञों के अनुसार मलेरिया की रोकथाम के लिए अगर अभी से प्रयास नहीं किए गए तो दो माह के भीतर एक बार फिर परिस्थितियां गंभीर हो सकती हैं। कोरोना की बात करें तो पिछले काफी दिनों से कोरोना के मामले इकाई में दर्ज किए जा रहे हैं। मलेरिया की तुलना में कोरोना के मामले अभी बेहद कम हैं। बीते आंकड़ों के अनुसार मलेरिया कोरोना से अधिक घातक रहा है।

फाल्सीफेरम के मामले में कमी आने से वाईवैक्स की रोकथाम के लिए लापरवाही भी साफ झलक रही है। संक्रामक रोग नियंत्रण माह की शुरुआत के बावजूद कोई मच्छर जनित रोगों की रोकथाम के लिए प्रचार-प्रसार के अतिरिक्त रोकथाम की कोई सार्थक पहल अब तक सामने नहीं आई है। पिछले महीने में कोरोना की रोकथाम के चलते कोई गतिविधि नहीं हो सकी।

इस संबंध में जिला मलेरिया अधिकारी डा. डीआर सिंह ने बताया कि वाईवैक्स के मामलो मे बढ़ोतरी देखने को मिली है, जिसको लेकर विभागीय स्तर पर कार्य किया जा रहा है। सभी सीएचसी-पीएचसी पर अधिक से अधिक संख्या में जांच कराने के निर्देश जारी किए गए है।

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