लखनऊ: आरटीई के तहत तीन सालों से नहीं मिला फीस पूर्ति का पैसा, निजी स्कूलों ने खड़े किए हाथ

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लखनऊ। शिक्षा का अधिकार अधिनियम आरटीई के तहत बच्चों के नाम पर मिलने वाली सरकारी फीस का पैसा पिछले तीन सालों से निजी स्कूलों कों नहीं मिल पा रहा है, हालात ये हैं कि बच्चों का चयन लॉटरी सिस्टम से होने के बाद भी स्कूल प्रबंधन प्रवेश लेने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में अभिभावक …

लखनऊ। शिक्षा का अधिकार अधिनियम आरटीई के तहत बच्चों के नाम पर मिलने वाली सरकारी फीस का पैसा पिछले तीन सालों से निजी स्कूलों कों नहीं मिल पा रहा है, हालात ये हैं कि बच्चों का चयन लॉटरी सिस्टम से होने के बाद भी स्कूल प्रबंधन प्रवेश लेने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में अभिभावक आये दिन शिक्षा विभाग के चक्कर लगाने के लिए मजबूर हैं।

वहीं दूसरी ओर बच्चों का प्रवेश न लेने वाले स्कूल प्रबंधकों के खिलाफ बेसिक शिक्षा अधिकारी ने नोटिस जारी कर दिया है, बीएसए का कहना है कि फीस प्रति पूर्ति का बजट आते ही पैसा जारी किया जायेगा लेकिन कोई बच्चा दाखिले से वचिंत होगा तो कार्रवाई की जायेगी। इस बार 12 हजार 770 बच्चों का चयन किया गया है। गौरतलब है कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में पहली से 8वीं कक्षा तक 25 प्रतिशत तक के नामांकन को निशुल्क शिक्षा देनी होती है। इसकी भुगतान सरकार द्वारा एक साल में दो किश्तों द्वारा किया जाता है। लेकिन राजधानी के अधिकांश स्कूलों का भुगतान नहीं किया गया है।

एक करोड़ से अधिक का मिला बजट

निजी स्कूल प्रबंधकों का आरोप है कि विभाग को पिछले सत्र में एक करोड़ छह लाख का बजट सरकार की ओर से दिया गया लेकिन उन्हे फीस का पैसा नहीं दिया गया है। जबकि सभी स्कूलों के दस्तवेजों का भौतिक सत्यापन भी करवा लिया गया।

कोरोना काल के भुगतान पर असमंजस

वहीं कोरोना काल में अभिभावकों को फीस का भुगतान करने का आदेश देने के बाद अब निजी स्कूलों को सरकार द्वारा फीस की राशि का भुगतान होगा या नहीं इसे लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।

फीस का बजट अभी सरकार से नहीं मिला है, कागजी कार्रवाई पूरी कर दी गयी है, बजट आते ही दिया जायेगा। लेकिन कोई प्रबंधक चयनित बच्चे को दाखिले से वंचित नहीं कर सकता है, जिनकी शिकायतें आयी हैं उनको नोटिस जारी किया गया है…विजय प्रताप सिंह बीएसए लखनऊ।

बच्चों का निशुल्क प्रवेश तय समय में लिया और पढ़ाया भी गया, लेकिन फीस प्रति पूर्ति का पैसा विभाग की ओर से नहीं किया गया, जबकि तीसरा साल शुरू हो चुका है। पैसा न मिलने से शिक्षकों को वेतन भी देने में दिक्कत हो रही है…वाईपी सिंह प्रबंधक योगिता माण्टेसरी स्कूल।

विभाग ने जो भी पेपर मांगे वह सब समय से जमा कराये जा चुके हैं उसके बाद भी निजी बजट नहीं दिया गया। ऐसे में स्कल प्रबंधकों को अपने पास से शिक्षकों को वेतन देना पड़ा है…आशीष पाण्डेय प्रबंधक सरस्वती एकेडमी।

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