मुरादाबाद: बंदी महिलाओं के बनाए दीयों से जगमग होगी दीवाली
मुरादाबाद, अमृत विचार। जिला कारागार में बंद महिलाओं कैदियों के हाथों से बने दीये इस बार दीवाली पर घरों की शोभा बढाएंगे। देसी गाय के गोबर से बने दीपक के अलावा लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों का विधिविधान से पूजन होगा, वहीं अगरबत्ती, धूपबत्ती भी घरों को महकाएंगी। इस काम में मुस्लिम महिला बंदी भी हुनर दिखा …
मुरादाबाद, अमृत विचार। जिला कारागार में बंद महिलाओं कैदियों के हाथों से बने दीये इस बार दीवाली पर घरों की शोभा बढाएंगे। देसी गाय के गोबर से बने दीपक के अलावा लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों का विधिविधान से पूजन होगा, वहीं अगरबत्ती, धूपबत्ती भी घरों को महकाएंगी। इस काम में मुस्लिम महिला बंदी भी हुनर दिखा रही हैं।
कहावत है कि काबिलियत कहीं नहीं छिपती। प्रतिभा कहीं भी हो अपना रंग दिखा ही देती है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है जिला कारागार में विभिन्न अपराधों में बंद महिलाओं ने। उन्होंने देसी गाय के गोबर से लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां बनाकर अपनी कलाकारी का लोहा मनवा लिया है। इन महिलाओं द्वारा बनाई गईं देवी-देवताओं की मूर्तियां देखते ही मन मोह लेती हैं। बंदियों ने दीपावाली के लिए दीपक भी बनाए हैं।
इस काम में जिला कारागार में बंद मुस्लिम महिलाएं भी पूरा सहयोग कर रही हैं। महिला बंदी रानी, पायल, रेनू, सत्यवती, मंजू, दामिनी के साथ ही मोमीना, सोनम, कमरजहां, खुशमिना और सबीना भी अपना हुनर दिखा रही हैं। वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने बताया कि कारागार एवं समाज को जोड़ने का यह प्रयास निरंतर जारी रहेगा।
उन्होंने बताया कि महिला बंदियों के बाद पुरुषों को भी इस तरह के कार्य करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इस अवसर पर वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के अलावा जेलर मृत्युंजय पांडे, विजय गुप्ता, डिप्टी जेलर अनुज कुमार, पुष्पेंद्र कुमार विक्रम, पुष्पा एवं अविता श्रीवास्तव आदि रहे।
20 रुपये तक मिलती है मजदूरी
गाय के गोबर से प्रतिमा, दीपक, धूपबत्ती व अन्य सामान बनाने वाली महिलाओं को दो से 20 रुपये तक प्रति नग के हिसाब से मजदूरी मिलती है। इन्हें बनाने में प्रयुक्त होने वाला गोबर, मुल्तानी मिट्टी और अन्य सामग्री भी एक स्वयंसेवी संगठन द्वारा ही उपलब्ध कराई जाती है। छोटे-बड़े आइटम के हिसाब से बंदी महिलाओं को मजदूरी दी जाती है।
मिल रहे हैं ऑनलाइन आर्डर
देसी गाय के गोबर से बनी प्रतिमाओं की देश ही नहीं विदेश में भी अच्छी खासी मांग है। महिला बंदियों द्वारा बनाए गए इन आइटमों के लिए अमेजॉन, फिलिपकार्ड, मिंतरा आदि पर खूब आर्डर मिल रहे हैं।
