UP News : सहारनपुर की DLC वंदना सस्पेंड, जानें-कौन सा फैसला बन गया डिप्टी लेबर कमिश्नर का जंजाल
उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड' के सचिव को पदेन जांच अधिकारी बनाया गया है। कानपुर के श्रमायुक्त को निर्देशित किया गया है कि वह तीन दिन में आदेश तामील कराएं और 15 दिन के भीतर साक्ष्यों के साथ चार्जशीट शासन को भेजें।
अमृत विचार : शासन ने सहारनपुर की उप-श्रमायुक्त (डिप्टी लेबर कमिश्नर) वंदना को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन पर कथित रूप से वित्तीय अनियमितता के आरोप हैं। कानपुर श्रमायुक्त की जांच रिपोर्ट के बाद, शासन ने डिप्टी लेबर कमिश्नर वंदना को निलंबित करने का आदेश जारी किया है। इस दौरान उन्हें कानपुर श्रमायुक्त कार्यालय से संबद्ध किया गया है।
सहारनपुर की उप-श्रमायुक्त के खिलाफ सिलसिलेवार तरीके से कई शिकायतें शासन तक पहुंची थी। राज्यपाल से अनुमति मिलने के बाद जांच टीम गठित की गई। प्राथमिक स्तर पर उनके खिलाफ गंभीर मामले सामने आई हैं।
18 लाख वूसली का अपना फैसला पलटा
-कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम के तहत दर्ज एक मामला (ईसीए संख्या-11/2019) से जुड़ा है। इस मामले की सुनवाई के दौरान उप श्रमायुक्त वंदना ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला दिया। इस मामले में उन्होंने 18 लाख रुपये की वसूली का आदेश जारी किया। लेकिन बाद में अपने ही आदेश को वापस ले लिया। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, कर्मचारी प्रतिकर आयुक्त को अपने ही फैसले की समीक्षा या रीकॉल करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। इस तरह पीड़ित श्रमिक न्याय और अधिकार से वंचित हो गया, जो न्याय के सिद्धांत का घोर उल्लंघन है।
सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान
दूसरा मामला,सहारनपुर के मलीपुर रोड स्थित 'मेसर्स निदान सेवाग्राम हॉस्पिटल' से जुड़ा है। अस्पताल के भवन निर्माण की लागत पर श्रम उपकर (सेस) का निर्धारण लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की अधिसूचित दरों पर होना था। आरोप है कि उप श्रमायुक्त ने नियमों को नजरंदाज कर दिया। मनमर्जी से एकमुश्त आधार पर सेस का लगाया। सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा।
बोर्ड के सचिव करेंगे जांच
-प्रमुख सचिव डॉ. एमके. शन्मुगा सुंदरम की ओर से जांच निलंबन आदेश में कहा गया कि उप-श्रमायुक्त वंदना को प्राथमिक जांच में दोषी पाया गया है। इसलिए उन्हें फौरन निलंबित किया जाता है। उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड' के सचिव को पदेन जांच अधिकारी बनाया गया है। कानपुर के श्रमायुक्त को निर्देशित किया गया है कि वह तीन दिन में आदेश तामील कराएं और 15 दिन के भीतर साक्ष्यों के साथ चार्जशीट शासन को भेजें।
