यूपी: बंद स्कूलों में एक लाख बच्चों ने चखा एमडीएम का स्वाद, अफसर हैरान

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Edited By Amrit Vichar
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लखनऊ। राजधानी में गुरूवार को जहां एक ओर तेज बारिश हो रही थी वहीं दूसरी ओर बेसिक शिक्षा परिषद के सरकारी बंद स्कूलों में बच्चे मध्यान्ह भोजन का स्वाद चख रहे थे। इस तरह एक लाख बच्चों को भोजन खिलाये जाने का दावा अमृत विचार से बातचीत में संस्था अक्षय पात्र की ओर से किया …

लखनऊ। राजधानी में गुरूवार को जहां एक ओर तेज बारिश हो रही थी वहीं दूसरी ओर बेसिक शिक्षा परिषद के सरकारी बंद स्कूलों में बच्चे मध्यान्ह भोजन का स्वाद चख रहे थे। इस तरह एक लाख बच्चों को भोजन खिलाये जाने का दावा अमृत विचार से बातचीत में संस्था अक्षय पात्र की ओर से किया गया है। इस दावे के बाद अफसर भी हैरान हैं कि इतनी तेज बारिश में जब बच्चे स्कूल गये नहीं तो भोजन कैसे खा सकते हैं? इस संबंध में जब मध्यान्ह भोजन प्राधिकरण के उप निदेशक उदयभान सिंह से बात की गयी तो उन्होंने कहा कि जो रजिस्ट्रर पर उपस्थि​ति होगी उसे ही माना जायेगा, अक्षय पात्र का दावा मान्य नहीं किया जायेगा, और पैसों का भुगतान भी नहीं किया जायेगा।

बता दें कि राजधानी में बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित प्रा​थमिक और जूनियर के करीब 1860 विद्यालयों का संचालन किया जाता है। इन विद्यालयों में पढ़ने वाले करीब एक लाख 80 हजार बच्चों को मध्यान्ह भोजन परोसे जाने की जिम्मेदारी संस्था अक्षय पात्र पर है। गुरूवार को तेज बा​रिश के चलते स्कूलों में बच्चे नहीं पहुंच सके थे और संस्था जीएम अनूप चतुर्वेदी ने बताया गया कि एक लाख बच्चों को भोजन परोसा गया है।

बिना सीएल के गायब रहे गुरू जी

वहीं दूसरी ओर तेज बारिश के चलते विद्यालयों में अधिकांश शिक्षक नहीं पहुंचे, कई विद्यालय ऐसे भी रहे जहां ताला लटका रहा। शिक्षकों ने इस आपदा में अवसर का भरपूर लाभ लेते हुए छुट्टी भी चढ़ाई न ही आनलाइन छुट्टी के लिए आवेदन किया। सवाल यह है कि इस तरह की मनमानी को भ्रष्टाचार क्यों न माना जाये, और क्यों न ऐसे शिक्षकों के वेतन की कटौती की जाये।

सीडीआर खोल सकती है शिक्षकों की उपस्थिति का सच

यहां सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की संख्या करीब छह हजार है। गुरूवार को विद्यालय शिक्षक पहुंचे की नहीं इस बात का खुलासा उनकी मोबाइल लोकेशन से हो सकता है। इस बारे में पुलिस विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि बिना ड्यूटी के वेतन लेना तो अपराध है, अगर विभागीय शिकायत हो तो कार्रवाई संभव है।

संस्था से मैने भोजन को लेकर जवाब मांगा है, उनका कहना है​ कि भोजन बन चुका था, ऐसे में बर्बादी न हो इसलिए बच्चों के घर रसोईयों के माध्यम से भोजन भेजा गया है, इसका पैसा भी संस्था ने नहीं मांगा है। रही ​बात शिक्षकों की उपिस्थति की तो इस मामले की जांच करायी जायेगी, जो भी अनुपस्थित​ होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी..विजय प्रताप सिंह बीएसए लखनऊ।

तेज बारिश के चलते शिक्षकों को विद्यालय पहुंचने में समस्यां जरूर हुई है लेकिन, सभी शिक्षक अनुपस्थित रहे हों ऐसा नहीं कहा जा सकता है। जो शिक्षक नहीं गये हैं उन्होंने छुट्टी लिया है। अक्षय पात्र की ओर से भोजन भेजा गया था लेकिन बच्चे नहीं थे इसलिए उनके घर रसोईयों ने पहुंचाने का काम किया है…विनय कुमार सिंह प्रांतीय अध्यक्ष पीएसपीएसए।

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